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बाल संरक्षण के पास पहुंचा मामला, चेयरपर्सन ने मांगी एसपी से पांच दिन में रिपोर्ट

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तीनों शिक्षकों पर केस दर्ज होने के बाद एफआईआर की कॉपी दिखाते प्रताप खोबड़ा। - फोटो : Fatehabad
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टोहाना के एक विद्यालय में शिक्षकों द्वारा 40 बच्चों से की गई मारपीट का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। 10 बच्चों की एमएलआर के बाद अध्यापिका समेत तीन शिक्षकों पर केस दर्ज हुआ तो स्कूल में मंगलवार को स्कूल में दहशत का माहौल रहा। स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम रही। मामला अब बाल संरक्षण आयोग के पास भी पहुंच गया है और चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक से पांच दिन में मामले पर रिपोर्ट मांगी है। उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मामले का पता लगा, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार को पत्र भेजा। शिक्षकों ने सोमवार को हुए घटनाक्रम को लेकर खेद भी जताया। इस दौरान शिक्षकों ने माफीनामा लिखकर बच्चों से उस पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। बच्चों की तरफ से लिखवाने का प्रयास किया गया कि इस पूरे प्रकरण को लेकर उन्होंने आरोपी शिक्षकों को माफ कर दिया है और वह किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं। मगर बच्चों ने हस्ताक्षर करने से स्पष्ट इंकार कर दिया। जिसके बाद विवाद और ज्यादा गहरा गया है।
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शिक्षा विभाग अधिकारी समझौते के लिए बना रहे दबाव
बच्चों के परिजनों का कहना है कि स्कूल के शिक्षकों से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी तक मामले में समझौते का दबाव डाल रहे हैं। सोमवार को दिन में बच्चों की पिटाई के बाद भी देर रात तक पंचायतों का दौर चलता रहा। पहले तो माफी मांगकर पीछा छुड़वाने का प्रयास किया गया। बाद में पुलिस केस होने पर बच्चों का भविष्य बर्बाद करने का भी डर दिखाया गया। मामले में बच्चों व उनके परिजनों द्वारा ठोस कार्रवाई की मांग जारी रखने के कारण पुलिस प्रशासन को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी है।
एक शिक्षक पहले भी करता रहा है मारपीट, कई बच्चे छोड़ गए स्कूल
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मामले में आरोपी एक शिक्षक पहले भी बच्चों के साथ मारपीट करता रहा है। इस कारण कई बच्चे स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट लेकर स्कूल छोड़ गए। स्कूल छोड़ने वाले बच्चों ने आसपास के दूसरों स्कूलों में दाखिला ले लिया। सोशल मीडिया पर भी इस घटनाक्रम के वीडियो डालने के बाद स्कूल के पूर्व छात्रों ने भी इस शिक्षक द्वारा उनके समय में मारपीट की बात कही है।
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प्रिंसिपल के पास बीईओ का कार्यभार, कैसे होगी निष्पक्ष जांच
मामले में एक पेंच यह भी सामने आया है कि इसी स्कूल के प्रिंसिपल मुकेश शर्मा को ही टोहाना के खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यभार सौंपा हुआ है। जिला शिक्षा अधिकारी दयानंद सिहाग ने भी इस मामले की जांच के लिए बीईओ के रूप में मुकेश शर्मा को ही जिम्मा दिया है। हालांकि, मामले को घटित हुए दो दिन हो चुके हैं, लेकिन प्रिंसिपल व बीईओ दोनों ही रूप से मुकेश शर्मा मामले का पटाक्षेप नहीं कर पाए हैं।
छात्रों का आरोप, जातिसूचक शब्दों के साथ दी गालियां
मामले में पुलिस को दी शिकायत में छात्रों ने आरोप लगाया है कि तीनों शिक्षकों ने उन्हें डंडों से पीटते समय जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गालियां भी निकाली। उनको सरकार के स्टाईफंड के चक्कर में स्कूल में आने के लिए कहा गया। छात्रों ने आरोप लगाया है कि पहले डीपीई व महिला शिक्षक ने पीटा, इसके बाद कॉमर्स प्राध्यापक ने आकर डंडों से पिटाई की। इस दौरान कई छात्रों की हालत तो ज्यादा खराब हो गई थी।
आरोपी शिक्षकों को बर्खास्त करें सरकार, नहीं तो भीम आर्मी करेगी प्रदर्शन : प्रताप खोबड़ा
भीम आर्मी एकता मिशन के जिला महासचिव प्रताप खोबड़ा का कहना है कि जैसे ही उन्हें पता चला कि स्कूल में बच्चों को बुरी तरह पीटा गया है तो वह पता करने स्कूल में गए थे। बच्चे बुरी तरह से जख्मी थे। मैंने प्रिंसिपल से बात की तो उन्होंने शिक्षकों के ऊपर कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। खोबड़ा ने कहा कि अगर जल्दी ही आरोपी शिक्षकों को गिरफ्तार करके उन्हें बर्खास्त नहीं किया गया तो भीम आर्मी धरना-प्रदर्शन को मजबूर होगी।
छेड़छाड़ का झूठा केस दर्ज करवाकर भविष्य बर्बाद करने की दी धमकी : मांगेराम
शिकायतकर्ता छात्र के दादा मांगेराम ने आरोप लगाया कि पहले तो स्कूल के शिक्षक उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव डालते रहे। महिला शिक्षक द्वारा छेड़छाड़ का झूठा केस दर्ज करवाकर बच्चों का भविष्य बर्बाद करने तक की धमकी दी गई। मगर जब हम परिजन नहीं माने तो शिक्षिका द्वारा शिकायत देकर छेड़छाड़ का झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया गया है।
चेयरपर्सन ने कहा, मामले की गंभीरता को समझते हुए सही हो जांच
राज्य बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने एसपी को भेजे पत्र में कहा है कि आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया है। बच्चों के साथ हुई मारपीट के इस मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस सही प्रक्रिया अपनाकर पूरी जांच करवाए। बच्चों का मेडिकल एग्जामिन भी करवाया जाए। मामले में एसपी राजेश कुमार को पांच दिन में रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है।
पिटाई करना ठीक नहीं
हमने व्यवस्था बनाने के लिए घंटी बजने के समय शिक्षकों की ड्यूटी लगाई हुई है। शिक्षिका जब व्यवस्था बनाने आई तो एक छात्र ने सीटी बजाई। जब किसी ने नाम नहीं बताया तो बच्चों की पिटाई की गई। हालांकि, पिटाई करना भी ठीक नहीं है। हम मामले की जांच कर रहे हैं।
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- मुकेश शर्मा, प्रिंसिपल एवं कार्यकारी बीईओ, टोहाना
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