फतेहाबाद। सरकारी स्कूलों को मॉडल का रूप देने का दावा किया जा रहा है और पिछली व्यवस्थाओं को सुधारने की जगह आगे नई योजनाएं बनाई जा रही हैं, हालात ये हैं कि पुरानी योजनाएं सिरे चढ़ रही हैं और न ही नई चढ़ी हैं। हालात यह है कि मॉडल सरकारी स्कूलों में बिजली जाते ही विद्यार्थियों को किताबों से हवा करके खुद का पसीना सूखाना पड़ रहा है। जबकि विभाग ने सरकारी स्कूलों में 122 आटोमैटिक जनरेटर भेजे थे, जो रखे-रखे ही कंडम हो गए हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को शिक्षा विभाग ने 11 साल पहले 122 आटोमैटिक जनरेटर दिया था। लेकिन जनरेटर की मरम्मत के लिए विभाग ने बजट ही नहीं जारी किया और न ही जनरेटर चलाने के लिए डीजल की व्यवस्था की गई। वर्ष 2015 में पांच हजार रुपये डीजल के लिए जारी हुए थे, इसके बाद बाद एक रुपया भी विभाग ने जारी नहीं किया है। बता दें कि स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए आईसीटी लैब शुरू की गई थी, इसी योजना के तहत जिले के 122 स्कूलों को जनरेटर मिले थे। हालात ये है कि शिक्षा विभाग ने जनरेटरों की मरम्मत के लिए और न ही कंप्यूटर लैब के लिए बजट जारी किया है। सरकारी स्कूल मुखियाओं का कहना है कि 11 साल पहले जनरेटर दे दिए गए थे, लेकिन ये तय नहीं किया गया कि इसे चलाने के लिए डीजल का बजट कहां से आएगा। इसके चलते स्कूल मुखिया खुद ही जनरेटर चलाने से पीछे हट गए और जनरेटर बिना चले ही कंडम हो गए। संवाद
किसी की बैटरी हो गई डेड तो किसी के तार हो चुके खराब
सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में 11 साल पहले आए जनरेटरों के फिलहाल हालात ये हो चुके हैं कि अधिकतर की बैटरी डेड हो चुकी हैं, इसके अलावा किसी के तार टूट चुके हैं तो किसी का पार्ट्स खराब हो चुका है। हालात ये हैं कि कोई भी जनरेटर चालू करने की हालत में ही नहीं है।
अहरवां प्राइमरी स्कूल में लगा जनरेटर खराब
गांव अहरवां के प्राइमरी स्कूल में जनरेटर लगा है लेकिन खराब हो चुका है। सोमवार को स्कूल में पड़ताल की गई। मुख्य शिक्षक देवेंद्र सिंह दहिया ने बताया कि कब बिजली सप्लाई बंद हो जाती है पता नहीं होता। सप्लाई कई बार तीन से चार घंटे तक बंद रहती है। गर्मी में हालात ये है कि विद्यार्थियों को पसीना सूखाने के लिए किताबों से खुद को हवा करनी पड़ रही है। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ, बिजली सप्लाई बंद होते ही विद्यार्थियों ने किताब उठाई और खुद को हवा करने में जुट गए।
जनरेटर के लिए डीजल मिलता नहीं, कैसे चलाएं
राजकीय उच्च विद्यालय मानावाली के मुख्य अध्यापक अश्वनी कंपानी बताते हैं कि 2011 में जनरेटर स्कूलों में लगाए गए थे, शुरू में शिक्षा विभाग ने सुध ली थी लेकिन 10 साल से डीजल के लिए बजट नहीं आया है। इसके चलते जनरेटरों का प्रयोग नहीं हो रहा है। बिजली सप्लाई जाती है तो विद्यार्थियों को कमरों से निकालकर बरामदे बिठाना पड़ रहा है। सोमवार को यहां करीब डेढ़ घंटे बिजली का कट रहा है।
पेड़ के नीचे लगानी पड़ रही हैं कक्षाएं
राजकीय प्राथमिक पाठशाला बनावाली सोत्तर के मुख्य शिक्षक विकास टुटेजा बताते हैं कि उनके स्कूल में जनरेटर नहीं और न ही इंवर्टर बैटरी की व्यवस्था है, बिजली सप्लाई जाने पर विद्यार्थियों को बरामदे में या फिर पेड़ के नीचे बिठाकर कक्षाएं लगानी पड़ रही है।
कोट
स्कूलों में कंप्यूटर लैब चलाने के लिए जनरेटर दिए गए थे। अलग से कोई बजट इसके लिए जारी नहीं हो रहा है। जनरेटर की मरम्मत को लेकर उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा।
-दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी
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गांव अहरवां के सरकारी स्कूल में बिजली सप्लाई जाने पर किताब से खुद को हवा करते हुए विद्यार्थी।- फोटो : Fatehabad