फतेहाबाद में आसमान में छाया धुआं।
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फतेहाबाद। जिले के वातावरण में अभी भी प्रदूषण बरकरार है। रविवार को तेज धूप निकलने के कारण मौसम कुछ बदला सा जरूर नजर आया। मगर एक्यूआई पूरे दिन 350 से पार ही रहा। दिन की बजाय रात की हवा और ज्यादा खराब हो रही है। रात में एक्यूआई 385 तक पहुंच रहा है। वहीं जिले में 65 जगहों पर पराली जलाने की लोकेशन हरसैक ने ट्रैस की।
पराली में आग लगाने की घटनाएं बढ़ने के साथ ही जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स भी बढ़ चुका है। जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना गया है। ऐसे में जिले में लगातार जहरीली हो रही हवा लोगों के लिए खतरे की घंटी बजा रही है। गौरतलब है कि जिले में 750 से ज्यादा जगहों पर पराली में आग लगाने के मामले आ चुके हैं। प्रशासन हरसैक द्वारा भेजी गई लोकेशन के आधार पर मौके पर अधिकारी भेजकर जांच करवाता है।
पराली जलाने से जमीन के पोषक तत्व भी हो रहे नष्ट
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पराली को जलाने से सिर्फ पर्यावरण ही दूषित नहीं होता बल्कि जमीन के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। पराली को आग लगाने से एक एकड़ में 25 किलो पोटाश और पांच किलो नाइट्रोजन नष्ट हो जाती है। दो किलो फासफोरस की बर्बादी होती है। आग लगाने की वजह से जमीन के 70 फीसदी माइक्रो न्यूट्रेन के नुकसान की भरपाई तो किसी भी कीमत पर नहीं हो पाएगी। अगर लगातार तीन साल खेत में पराली को मर्ज किया जाए तो रासायनिक खादों की 45 फीसदी जरूरत कम हो जाएगी।
रविवार का एक्यूआई
सुबह 10 बजे : 382
सुबह 11 बजे : 381
दोपहर 12 बजे : 379
दोपहर 1 बजे : 378
दोपहर 2 बजे : 377
दोपहर 3 बजे : 375
शाम 4 बजे : 373
शाम 5 बजे : 371
शाम 6 बजे : 368
कोट
पराली नहीं जलाने के लिए किसानों को जागरूक करने में प्रशासन लगा हुआ है। गांव स्तर पर कमेटियां बनाई हुई हैं। यह सही है कि पराली जलाने से मित्र किट भी नष्ट होते हैं, इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति पर बुरा असर पड़ता है।
डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग