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कोरोना काल में बंद हुए 800 से ज्यादा पंजीकृत कारोबार

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कोरोना की संभावित तीसरी लहर सबसे ज्यादा कारोबारियों को चिंता में डाल रही है। वजह ये है कि कोरोना की दो लहरों ने 800 से ज्यादा कारोबार बंद कर दिए। कोरोना की पहली ही लहर में कई कारोबार बंद हो गए। मार्च 2020 में लॉकडाउन शुरू हुआ था। पहले ही साल में, यानी मार्च 2021 तक उप आबकारी एवं कराधान डिपार्टमेंट (डीईटीसी) सेल टैक्स के सामने 639 कारोबारियों ने अपना गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) नंबर सरेंडर कर दिया है।
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मार्च 2021 के बाद भी करीब 200 आवेदन आ चुके हैं। ज्यादातर ने लॉकडाउन में आई मंदी को कारोबार बंद होने को वजह बताया। डीईटीसी सेल टैक्स ने भी वेरिफिकेशन के बाद पाया है कि कारोबार बंद होने के कारण जीएसटी नंबर सरेंडर करने पड़ रहे हैं। कारोबार बंद होने से न सिर्फ कारोबारियों को नुकसान हुआ है, बल्कि वहां पर काम करने वाले लोगों का भी रोजगार छिन गया। एक अनुमान के मुताबिक 6000 लोगों का रोजगार कारोबार बंद होने से छिना है। ये सिर्फ पंजीकृत कारोबारों का लेखा जोखा है। लगभग इसके दो गुना अपंजीकृत व्यवसाय भी बंद हुए हैं। संवाद
नंबर बहुत ने लिए, व्यवसाय चला नहीं
सर्विस या रिटेलर क्षेत्र में 20 लाख और गुड्स क्षेत्र में 40 लाख का सालाना टर्नओवर कारोबारी को जीएसटी नंबर की जरूरत है। इससे नीचे कारोबार करने वाले को जीएसटी नंबर की जरूरत नहीं है। मगर कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने संभावित कारोबार के आधार पर नंबर ले लिए, लेकिन बाद में उम्मीद मुताबिक सेल नहीं कर पाए। या कहें कारोबार चल नहीं पाया। ऐसे लोग भी जीएसटी नंबर सरेंडर करने वालों में शामिल हैं।
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टैक्स के दायरे में नहीं आते कई कारोबारी
कई ऐसे छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारी थे, जिन्होंने जीएसटी पंजीकरण तो करा लिया लेकिन उनके सालाना टर्नओवर कम है। अब ऐसे कारोबारियों के सामने यह मुश्किल है कि वे टैक्स के दायरे में आते भी नहीं, लेकिन टैक्स उतना ही भरना पड़ता है। ऐसे ही व्यापारियों की दिक्कत को देखते हुए सरकार ने जीएसटी पंजीकरण कैंसिल करने की भी व्यवस्था कर रखी है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
ये भी हैं कारोबार बंद होने की वजहें
संबंधित विभाग के मुताबिक जीएसटी सरेंडर का मतलब यह नहीं कि सभी कारोबार लॉकडाउन में आई मंदी के कारण ही बंद हुए हैं। फर्म मालिक की मौत हो जाना, पार्टनशिप टूट जाना, कारोबार का अनुभव न होना, प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाना, उधार माल ज्यादा बेचना, फर्म मालिक का कर्जदार होना, आकस्मिक नुकसान होने जैसे कारणों के चलते भी कारोबार प्रभावित होते हैं। ऐसे में कारोबारी अपना जीएसटी नंबर सरेंडर कर देते हैं। मगर लॉकडाउन में आई मंदी सबसे बड़ा कारण मानी जा रही है।
लॉकडाउन का व्यापक असर रहा: अधिकारी
जीएसटी सरेंडर करना या नंबर कैंसिल कराने की प्रक्रिया चलती रहती है। इसके लिए आवेदन आते रहते हैं, क्योंकि कई कारोबार बंद होते हैं तो कई नए खुलते हैं। कोरोना काल में काफी आवेदन आए हैं। लॉकडाउन के दौरान आई मंदी का काफी असर कारोबार पर पड़ा है।
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-अंजू सिंह, उपायुक्त, आबकारी एवं कराधार विभाग (सेल टैक्स) फतेहाबाद।
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