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मॉडल संस्कृति स्कूल में 9 कमरे और 430 विद्यार्थी, अकेली चला रहीं मुख्य शिक्षिका

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राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल भिरड़ाना-2। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। प्रदेश सरकार के दावों के इतर जमीनी हकीकत मॉडल संस्कृति स्कूलों में सुविधाओं की लगातार पोल खोल रहे हैं। 10 हजार से अधिक आबादी वाले गांव भिरड़ाना में राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल-2 खोला गया है। जहां अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दी जानी है। मगर पिछले दो साल से इस स्कूल में अकेली मुख्य शिक्षिका ज्योति बजाज ही हैं। दूसरे स्कूल के अध्यापक बारी-बारी से विद्यार्थियों को पढ़ाने आते हैं।
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मॉडल संस्कृति नाम सुनकर कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला इसमें करवाया तो विद्यार्थियों की संख्या 430 पहुंच गई है। फिर भी अध्यापकों की कमी ने विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। रोषित अभिभावकों का कहना है कि पिछले दो साल से कोरोना के कारण विद्यालय बंद थे, जिससे बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई। सरकार केवल कागजों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल बना रही है, इनमें सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं दिया है।
अध्यापकों का प्रबंध नहीं किया तो निजी स्कूलों में भेजने पड़ेंगे बच्चे
एसएमसी प्रधान भूषण नूनिया ने अभिभावकों सहित मुख्य शिक्षिका के माध्यम से मांग की कि या तो जल्द यहां अध्यापकों का प्रबंध किया जाए नहीं तो बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजेंगे। एसएमसी प्रधान भूषण नूनिया, धर्मवीर सिंह, पूर्व एसएमसी प्रधान वीर सिंह, सोहन सिंह, अभिभावक जसविंदर सिंह, कुलदीप, जसवंत सिंह, अनीता रानी, सीमा रानी, बलविंदर कौर, राजरानी आदि ने रोष जताते हुए कहा कि हमारे पास आर्थिक संसाधन कम है, जिससे अपने बच्चों को महंगे विद्यालय में नहीं पढ़ा सकते। मगर सरकार विद्यालय में सुविधाएं नहीं दे रही है।
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विद्यार्थियों की संख्या के मुताबिक 17 कमरे चाहिए
एसएमसी प्रधान भूषण नूनिया के मुताबिक 430 विद्यार्थियों के बैठने के लिए केवल 9 कमरे हैं। छात्र संख्या के अनुसार यहां पर 15 अध्यापक और 17 कमरे होने चाहिए। गौरतलब है कि भिरड़ाना में 2015 से पहले केवल एक प्राथमिक विद्यालय था। इसमें करीब 500 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते थे। 2015 में विभाग ने एक शाखा विद्यालय भिरड़ाना-2 से स्कूल की शुरुआत की थी। ग्रामीणों की मेहनत से इसमें सामान्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। पंचायत द्वारा जमीन दी गई। 2017 में स्कूल को कोड जारी हुआ और उसके दो वर्ष बाद मुख्य शिक्षिका ने कार्य ग्रहण किया, तब से लेकर अब तक यहां पर केवल एक मुख्य शिक्षिका ही कार्यरत हैं। बार-बार विंाग के पास लिखित व व्यक्तिगत रूप से एसएमसी सदस्यों द्वारा मांग की जा चुकी हैं, परंतु कोई समाधान नहीं हुआ।
तीन कमरे हो चुके मंजूर, नहीं हुआ निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार पिछले दो वर्षों से तीन कक्षा कमरे विभाग द्वारा मंजूर किए जा चुके हैं। उनकी टेंडर प्रक्रिया ही चल रही है। अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
कोट
प्राइमरी मॉडल संस्कृति स्कूलों में सुविधाओं को लेकर कुछ कमियां हैं। कुछ दिन पहले हमारी बैठक हुई थी, उसमें हमने मांग रखी थी। इसके बाद सभी स्कूलों से संबंधित मांग मुख्यालय को भेजी जा चुकी है।
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-अनीता सिंगला, डीईईओ, फतेहाबाद
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