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ओलंपिक में कैसे जीतेंगे पदक, न कोच, न ही खेल स्टेडियम, चंदे के सहारे चल रहा मैदान

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गांव बैजलपुर के हॉकी मैदान में अभ्यास करने वाले खिलाड़ी। संवाद - फोटो : Fatehabad
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भूना। ग्रामीण आंचल में ऐसी प्रतिभाएं हैं, जिनको अगर सुविधाएं मिलें तो वो भी ओलंपिक में पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ा सकती हैं। मगर हालात तो ऐसे हैं कि न कोच है, न खेल स्टेडियम हैं। खेल का मैदान भी चंदे के सहारे चल रहा है।
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भूना ब्लॉक के गांव बैजलपुर में हॉकी खेल नर्सरी मात्र रिकॉर्ड में चल रही है। खिलाड़ियों के लिए अभ्यास करने के लिए खेल स्टेडियम व खेल कीट तो दूर, प्रशिक्षण देने के लिए कोच की सुविधा भी नहीं है। बैजलपुर के पूर्व सरपंच प्रताप शर्मा, प्रभु दयाल और बिमला शर्मा बताते हैं कि पिछले कई वर्षों से लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान खेल स्टेडियम का मुद्दा उठाते रहे हैं, परंतु सता व विपक्ष के नेता मतदान के बाद दिखाई नहीं देते। इसलिए वर्षों पुरानी खेल स्टेडियम की मांग आज भी अधूरी है। बैजलपुर के लड़के एवं लड़कियों ने हॉकी खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निशुल्क में दे रहे हैं प्रशिक्षण
बैजलपुर के सरकारी स्कूल के खेल मैदान में वर्ष 2014 से 2019 के बीच बैजलपुर में हॉकी खेल बिल्कुल लुप्त हो गया था। मगर उसे पुनर्जीवित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने अपने गांव के युवाओं को हॉकी खेल का प्रशिक्षण देना शुरू किया। अब खेल मैदान में प्रतिदिन करीब 200 लड़के एवं लड़कियां हॉकी का अभ्यास कर रहे हैं। नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट रणसिंह ओला पिछले डेढ़ वर्ष से हॉकी खेल की गति को आगे बढ़ा रहे हैं। मगर सरकारी स्तर पर बैजलपुर में हॉकी के लिए कोई सुविधा नहीं है। फिर भी दर्जनों हॉकी खिलाड़ी नेशनल एवं इंटरनेशनल पदक जीत चुके हैं।
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बैजलपुर में हॉकी खेल पीटीआई सुनील कुमार की देन
अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी एवं बैजलपुर खेल नर्सरी के कोच रणसिंह ओला ने बताया कि वर्ष 2001में भिवानी के निवासी पीटीआई सुनील कुमार ने हॉकी खेल के प्रति स्कूली बच्चों में जज्बा पैदा किया था। उसके बल पर बैजलपुर के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। कई खिलाड़ी इंडिया टीम कैंप में प्रशिक्षण ले चुके हैं और ले रहे हैं। मगर वर्ष 2014 में हॉकी खेल असुविधाओं की भेंट चढ़ गया।
ये खिलाड़ी इंडिया कैंप में ले रहे हैं प्रशिक्षण
बैजलपुर में सुविधाओं के अभाव में भी हॉकी खेल के बल पर कई खिलाड़ी इंडिया कैंप में जगह बनाए हुए हैं। इनमें पवन ओला, मनीष बिश्नोई तथा लड़कियों में सुमिता नैन, रीना मावलिया व सोनू ओला शामिल हैं।
ये हैं नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट
नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ियों की लंबी सूची है। इनमें रणसिंह ओला, कर्मवीर सुंडा, सत्यवीर सिंह, अनिल ओला, मोहनलाल, विक्रम मावलिया, संदीप नैन तथा लड़कियों में कविता नैन, सुमिता नैन, ज्योति भिढासर, रजनी, शावी ओला, गीता जोगी, पूजा देवी, अल्का नैन शामिल हैं।
ये अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जो चलाएंगे नर्सरी
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके रणसिंह ओला के अलावा कर्मवीर सुंडा, कुलदीप सिंह, दयानंद, पवन ओला, मनीष बिश्नोई, विक्रम सिंह, सुनील ओला, भीम सिंह, मोहनलाल, अनिल कुमार, सुरेंद्र सिंह, जसवीर सिंह आदि बच्चों को हॉकी खेल का प्रशिक्षण देंगे। हालांकि, इनमें अधिकतर खिलाड़ी सरकारी विभागों में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। मगर इन्होंने अपने स्तर पर एक शेड्यूल बनाया हुआ है। जब भी छुट्टी आते हैं तो खेल मैदान में बच्चों को हॉकी के गुर सिखाएंगे।
एक दिन जरूर बैजलपुर के खिलाड़ी ओलंपिक में खेलेंगे
बैजलपुर के हॉकी खिलाड़ी एक दिन जरूर ओलंपिक में शामिल होकर पदक जीतकर लाएंगे। हमने आगे बढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के कारण पिछड़ गए। मेरा सपना है कि भविष्य में ओलंपिक में बैजलपुर के खिलाड़ी पदक जीतकर देश व प्रदेश का नाम रोशन करें।
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रणसिंह ओला, नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट एवं हॉकी खेल मैदान बैजलपुर के कोच
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