फतेहाबाद के बहुचर्चित दुष्कर्म केस में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. जिम्मी जिंदल को अदालत ने दोषी ठहरा दिया है। यह मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज बलवंत सिंह की अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने आईपीसी की धारा 376(सी) के तहत आरोपी को दोषी करार दिया है। 31 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। फिलहाल डॉ. जिम्मी को हिसार जेल भेज दिया गया है।
28 अक्तूबर 2017 को महिला पुलिस थाना में छात्रा की शिकायत पर धारा 354, 376, 506 के तहत डॉ. जिम्मी जिंदल पर केस दर्ज किया गया था। यह मामला चर्चा में रहने की वजह ये थी कि उस दौरान कुछ लोग डॉ. जिंदल को उसके अस्पताल से अर्धनग्न करके पीटते हुए शहर थाना में लेकर आए थे।
युवती के दिमाग में बुखार चढ़ने के कारण चला था इलाज
डॉ. जिंदल का सिरसा रोड पर निजी अस्पताल है। 27 अक्तूबर की दोपहर को कुछ लोग डॉ. जिंदल के अस्पताल पहुंचे और अस्पताल में तोड़फोड़ शुरू कर दी। डॉ. जिम्मी को पीटते हुए बाहर ले आए। उसके कपड़े फाड़ दिए और मुंह पर कालिख पोत दी। मारपीट करने वालों का आरोप था कि डॉक्टर ने उसके पास इलाज के लिए आई बीडीएस छात्रा के साथ छेड़खानी की है। उसे पीटते हुए पैदल ही शहर थाने ले आए। पुलिस के सामने मामला यह आया कि बीडीएस छात्रा बीमार थी। उसे फिजिशियन को दिखाया गया। फिजिशियन ने उसकी मां को बताया कि युवती के दिमाग में बुखार चढ़ गया है। इसलिए सलाह दी कि मनोरोग विशेषज्ञ को दिखाएं। उसकी मां उसे डॉ. जिम्मी जिंदल के पास ले गई।
आरोप था कि डॉक्टर छात्रा को घर ले गया
शिकायत में आरोप है कि डॉ. जिम्मी जिंदल ने युवती को नशा देकर अस्पताल में रख लिया और उसकी मां को किसी बहाने घर भेज दिया। इसके बाद डॉक्टर युवती को अपने घर ले गया, जहां पर कोई नहीं था। आरोप था कि घर पर डॉक्टर ने युवती के साथ अश्लील हरकतें की। उसी शाम को डॉक्टर युवती को वापस अस्पताल में लाया और यहां से उसका भाई उसे घर ले गया। रात भर युवती रोती रही। सुबह उसने परिवार के लोगों को जानकारी दी कि उसके साथ कुछ गलत हरकत हुई है। इसी पर उसके परिजन भड़क गए और डॉक्टर के अस्पताल में हंगामा किया गया।
बाद में लगाया दुष्कर्म का आरोप
इस मामले में शुरुआत में छेड़छाड़ के आरोप थे। इसलिए पुलिस ने धारा 354 के तहत केस दर्ज किया था। मगर बाद में पीड़िता ने बताया कि उसके साथ सिर्फ छेड़छाड़ नहीं, बल्कि दुष्कर्म हुआ है। वह घबराई हुई थी, इसलिए पूरी बात नहीं कह पाई। इसके बाद पुलिस ने मामले में दुष्कर्म की धारा जोड़ी। आरोपी डॉक्टर की तरफ से यह भी कहा गया था कि मारपीट करने वालों के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज हुआ है। इसलिए समझौता करने के लिए दुष्कर्म का आरोप लगाया है। मगर मामले की जांच के बाद पुलिस ने दुष्कर्म के आरोप को सही बताया था।
शिकायकर्ता पक्ष पर दर्ज मारपीट केस विचाराधीन
घटना के दौरान डॉ. जिम्मी की पत्नी शिया जिंदल अपने मायके थी। बाद में यहां पहुंचकर उसने थाने में शिकायत दी कि कुछ लोगों ने उसके अस्पताल में चोरी की, उसके पति का अपहरण कर ले गए और मारपीट की। यह शिकायत आने के बाद पुलिस ने 15-20 लोगों के खिलाफ धारा 452, 380, 365 के तहत केस दर्ज कर लिया। हालांकि, बाद में पुलिस ने अपहरण व चोरी जैसी कुछ गंभीर धाराएं हटा दी थी। यह मामला अभी तक कोर्ट में विचाराधीन है।
पति को दोषी करार देते ही रो पड़ी फिजियोथेरेपिस्ट पत्नी
गुरुवार को अदालत ने फैसला सुनाना था। डॉ. जिम्मी जिंदल व उनकी पत्नी डॉ. शिया जिंदल सुबह की कोर्ट में पहुंच गए। दिन भर अदालत के बाहर खामोश बैठे रहे। बीच-बीच में बातचीत भी कर रहे थे। दोनों के चेहरे पर मायूसी भी थी। शाम को करीब चार बजे अदालत ने निर्णय सुनाया। डॉ. जिम्मी जिंदल को दोषी करार देने की बात सुनते ही उसकी फिजियोथेरेपिस्ट पत्नी शिया अदालत से बाहर आकर रोने लगी। दोषी डॉक्टर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसने पुलिस हिरासत में भी हंगामा किया। वह जोर-जोर से चिल्लाता रहा। पुलिस ने उसे हिसार जेल भेज दिया है।