फतेहाबाद। आज के दिन हर साल बुराई के प्रतीक रावण का पुतला जलाया जाता है। मगर शहर की 10 समस्याएं ऐसी हैं, जो रावण के 10 सिर की तरह ही हैं। इन समस्याओं के भी दहन की जरूरत है। जनता इन समस्याओं से त्रस्त हो चुकी है। शहर की सड़कों पर मौत बनकर घूम रहे लावारिस पशुओं से लेकर लेकर जगह-जगह फैली गंदगी की समस्या नासूर बन गई है। शहर की सड़कों पर हो रहा अतिक्रमण और बढ़ता वायु प्रदूषण तो अब सांसों को घुटने पर मजबूर करने लगा है। नशे की बढ़ती लत युवाओं की जवानी बर्बाद कर रही है। इन समस्याओं के लिए कुछ प्रशासन जिम्मेदार है तो कुछ हमारी आदतें। आज संकल्प लेने की जरूरत है कि इन समस्याओं को जड़ से खत्म करना है।
1. अतिक्रमण
यह शहर ही नहीं बल्कि जिले भर की बड़ी समस्या है। फतेहाबाद, रतिया, टोहाना में अतिक्रमण ने खूब पांव पसार रखे हैं। नगर परिषद के कर्मचारी आते हैं, तो अतिक्रमण कम हो जाता है। अगले दिन वही समस्या फिर नजर आती है।
2. अवैध पार्किंग
वाहन चालक कहीं भी वाहन पार्क करके निकल जाते हैं। फिर यह भी नहीं देखते कि अवैध पार्किंग से दूसरों को परेशानी हो सकती है। वाहन ज्यादा हो चुके हैं। सड़कों की चौड़ाई कम पड़ रही है। अवैध पार्किंग के कारण जाम लगता है।
3. नशाखोरी
यह सबसे बड़ी व गंभीर समस्या है। एक सामाजिक बुराई भी है। इसके लिए कुछ हद तक समाज तो कुछ प्रशासन जिम्मेदार है। जिले में नशा करने वालों से कहीं ज्यादा संख्या नशा कारोबारियों की हो चुकी है।
4. टूटी सड़कें
शहरों से लेकर गांवों तक के लोग टूटी हुई सड़कों से परेशान हैं। इस समय शहरों की बहुत सारी गलियां व सड़कें टूटी पड़ी हैं। कई लिंक रोड खस्ता हालत में हैं। इसके अलावा गांवों की गलियां भी टूटी पड़ी हैं।
5. लावारिस पशु
जिले में लावारिस पशु गंभीर चुनौती हैं। जितने पशु इस समय नंदीशालाओं व गोशालाओं में हैं, लगभग उतने ही पशु सड़कों पर लावारिस हालत में घूम रहे हैं। इन पशुओं की वजह से आए दिन हादसे होते रहते हैं।
6. गंदगी
सड़कों पर बिखरा कचरा व गंदगी के ढेर बड़ी समस्या है। जिले में कचरा प्रबंधन प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है, लेकिन प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ रहा। आज स्थिति ये है कि गलियों से एकत्र कूड़ा ठिकाने लगाने की जगह भी नहीं है। सड़कों किनारे कचरा पड़ रहता है।
7. पानी निकासी की अव्यवस्था
बारिश के दिनों में पानी निकासी की समस्या बहुत ज्यादा सताती है। फतेहाबाद में धर्मशाला रोड व तुलसी चौक में लबालब पानी भर जाता है। इसके बाद पानी कई दिन भरा रहता है। भूना, टोहाना व रतिया में भी थोड़ी सी बारिश से सड़कें लबालब हो जाती हैं।
8. बढ़ता प्रदूषण
महानगरों के मुकाबले हमारे यहां ज्यादा वाहन नहीं हैं, लेकिन प्रदूषण का स्तर फिर भी खतरनाक रहता है। धान कटाई के बाद किसान फसलों के अवशेष जलाते हैं। उस दौरान का प्रदूषण सांसें लेना भी मुश्किल कर देता है।
9. सरकारी कार्यालयों का भ्रष्टाचार
सरकारी दफ्तरों में बढ़ता भ्रष्टाचार किसी समस्या से कम नहीं है। आम आदमी की जुबां पर रहती है कि सरकारी दफ्तरों में बिना पैसों के काम नहीं होता। भ्रष्टाचार की शिकायतों पर भी सुनवाई नहीं होती। बीते दिनों भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नगर परिषद कार्यालय में कुछ लोगों ने खूब हंगामा किया था।
10. स्वच्छ पेयजल की कमी
जनस्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराना विभाग का लक्ष्य है। मगर धरातल पर स्थिति भयानक है। पाइपों में लीकेज व विभाग की लचर कार्यशैली के चलते घरों में गंदा पानी पहुंचता है। बारिश के दिनों में समस्या गंभीर हो जाती है।
कोट
शहर में धीरे-धीरे सफाई व्यवस्था में सुधार हो रहा है। अतिक्रमण हटाने को लेकर भी अभियान चलते हैं। टूटी सड़कों की अभी मरम्मत शुरू होगी। अन्य समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रशासन अपने स्तर पर काम कर रहा है।
अजय चोपड़ा, जिला नगर आयुक्त, फतेहाबाद।
सड़क के बीच खड़ा एक लावारिस सांड।- फोटो : Fatehabad
मॉडल टाउन एरिया की खस्ता हाल सड़क।- फोटो : Fatehabad