फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल ब्लड बैंक में निजी अस्पतालों से आने वाले मरीजों को बेचे गए खून की राशि बैंक में जमा न करवाकर खुर्द-बुर्द कर दी गई। मामला उजागर होने के बाद करीब डेढ़ माह पहले कमेटी का गठन हुआ लेकिन अभी तक इसकी जांच पूरी नहीं हुई है।
इस मामले को लेकर जांच कमेटी मंगलवार को रिकॉर्ड जांचने के लिए पहुंचेगी। मामले में कई कर्मचारियों के बयान पहले ही दर्ज हो चुके हैं। इसके अलावा यहां से ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों के भी बयान दर्ज हुए हैं, लेकिन अभी तक पूरे मामले का खुलासा नहीं हुआ है कि कितने यूनिट रक्त बेचा गया और कितनी रकम बैंक में जमा नहीं करवाई गई है। इसके अलावा इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अधिकारियों की माने तो रोजाना एक से दो यूनिट ब्लड निजी अस्पतालों से आने वाले मरीज लेकर जाते हैं। एक यूनिट ब्लड का 1100 रुपये चार्ज लिया जाता है। सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीज के लिए रक्त निशुल्क है। गड़बड़ी वर्ष 2019 से बताई जा रही है। ऐसे में लाखों रुपये की राशि का हेर-फेर होने की आशंका है।
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ऐसे पकड़ में आया मामला
नागरिक अस्पताल प्रबंधन को जब बजट की जरूरत पड़ी तो ब्लड बैंक खाते की राशि का इस्तेमाल करने का फैसला लिया गया। बताया जा रहा है कि जब अधिकारियों ने खाते जांचे तो संबंधित कुछ कर्मचारियों ने टाल-मटोल करने का प्रयास किया। जब रिकॉर्ड जांचा तो गड़बड़ी की आशंका हुई और मामले की शिकायत सीएमओ को दी गई। सिविल सर्जन ने जांच के लिए कमेटी का गठन किया।
जिम्मेदारों ने बरती लापरवाही, नहीं मांगा हिसाब
नागरिक अस्पताल में चल रहे ब्लड बैंक में हुए गड़बड़झाला को लेकर इंचार्ज भी जिम्मेदार हैं। वर्ष 2019 से राशि खुर्द-बुर्द होती रही लेकिन जिम्मेदारों ने कर्मचारियों से हिसाब ही नहीं मांगा कि कितने यूनिट ब्लड बेचा गया और कितनी रसीद कटी और यह राशि जमा हुई है या नहीं।ब्लड बैंक को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों और डॉक्टरों को चार्ज दिया जा चुका है। अगर बड़ी गड़बड़ी सामने आती है तो इंचार्ज पर भी गाज गिरना तय है।
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फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र का मामला भी आ चुका सामने
स्वास्थ्य विभाग में पहले फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का मामला भी सामने आ चुका है। बिना असेसमेंट के ही फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बना दिए गए। मामले में सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मचारियों समेत 21 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है लेकिन यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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कुछ राशि जमा करवा दी गई है : सीएमओ
मामला चार से पांच माह पहले हिसाब मिलान के दौरान सामने आया था। बेचे गए ब्लड की कुछ राशि जमा करवाई गई और और कुछ नहीं हुई है। मामले में जांच कमेटी गठित की जा चुकी है। एक संबंधित कर्मचारी ने मामले से जुड़ी कुछ राशि जमा करवा दी है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
- डॉ. महेंद्र, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।