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पांच साल में 1429 सीएससी आवंटित, 715 पर लग चुका ताला

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मॉडल टाउन एरिया में चल रहा सीएससी। - फोटो : Fatehabad
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केंद्र व प्रदेश सरकार ने तमाम सरकारी सेवाएं ऑनलाइन कर रखी हैं। ऑनलाइन सेवाओं में आमजन को कोई परेशानी न आएं, इसके लिए सीएससी यानी कॉमन सर्विस सेंटर अलॉट किए जाते हैं। जिले में 1429 सीएससी वर्ष 2015 से अब तक अलॉट किए गए हैं। मगर ज्यादातर सेंटर सिर्फ कागजों में चल रहे हैं। धरातल पर उन सेंटरों का आमजन को कोई लाभ नहीं मिल रहा। लोग शौकिया तौर पर सीएससी के लिए आवेदन करते हैं। सरकार अलॉट कर देती है। मगर कुछ ही दिन में संचालक काम छोड़ जाते हैं। इस समय जिले में 715 सीएससी को ताला लगा हुआ है। या कहें कि इन सेंटरों का कहीं कोई अता पता नहीं है। सिर्फ कागजों में इनकी संख्या दर्ज है, लेकिन फायदा किसी को नहीं मिल रहा।
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आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई जानकारी में यह आंकड़ा सामने आया है कि फिलहाल जिले में 712 ही सीएससी काम कर रहे हैं। बाकी सेंटर बंद पड़े हैं। इन सेंटरों के संचालक कोई दूसरा रोजगार कर रहे हैं। इस समय ज्यादातर सेंटरों का कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। 84 सीएससी ग्राम सचिवालयों में चल रहे हैं। 20 सीएससी को आधार सेंटरों का दर्जा मिला हुआ है, जो सरकारी भवनों में चल रहे हैं। इसके अलावा बाकी के सेंटर अपनी दुकानों व घरों में चल रहे हैं। ऐसे सेंटरों का कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। कई सेंटर किराये की दुकानों में हैं। जैसे ही मालिक किराया बढ़ाते हैं, सेंटर संचालक अपनी जगह बदल जाते हैं। ऐसे में आमजन को पता ही नहीं चलता कि उनके आसपास कोई सीएससी है या नहीं।
दो अधिकारी, निरीक्षण करते ही नहीं
आरटीआई से यह भी खुलासा हुआ है कि अधिकारी सीएससी का निरीक्षण करने ही नहीं जाते। कुल 1429 सेंटरों में से आज तक सिर्फ 576 सीएससी का निरीक्षण किया गया है। बाकी सेंटरों में क्या चल रहा है, कहां स्थापित हैं, वहां पर लोगों को सेवाएं मिल रही हैं या नहीं, यह जानने का कभी प्रयास ही नहीं किया गया। हालांकि सीएससी पर निगरानी बनाए रखने के लिए दो जिला प्रबंधक भी कार्यरत हैं।
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सुविधाओं का भी रहता है अभाव
सीएससी खोलने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होता है। आवेदक के पास अच्छी स्पीड के साथ इंटरनेट कनेक्शन, कलर प्रिंटर, स्कैनर, वेब कैम, डिजिटल कैमरा, कम से कम 120 जीबी का हार्ड डिस्क ड्राइव, कंप्यूटर में कम से कम 512 जीबी रैम, सीडी-डीवीडी ड्राइव, 4 घंटे का बैटरी बैकअप होना चाहिए। कंप्यूटर चलाना आना चाहिए। इसके अलावा 100-200 वर्ग मीटर की खाली जगह होनी चाहिए। कम से कम दो कंप्यूटर होने चाहिए। इन शर्तों को पूरा करने के बाद आवेदक को टेस्ट देना होता है। बकायदा सरकार की तरफ से ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद सीएससी की अनुमति मिलती है।
कोट
सरकार के नियमानुसार सीएससी संचालकों को नियमित रूप से काम करना जरूरी होता है। यदि कोई सेंटर तीन महीने तक लगातार बंद रहता है तो उसकी आईडी ब्लॉक हो जाती है। इसलिए आधे सेंटर बंद हो चुके हैं।
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-शिल्पा, जिला प्रबंधक, सीएससी।
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