आईएमटी मानसेर की सुरक्षा-व्यवस्था खतरे में है। आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन जल्द ही इलाके से निजी सुरक्षा व्यवस्था हटाने जा रही है। एसोसिएशन निजी सुरक्षा पर हर महीने तकरीबन 25 लाख रुपये खर्च आने से परेशान है। इसके बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं।
आईएमटी मानेसर स्थित सैकड़ों औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा का मसला हमेशा से संवेदनशील रहा है। इकाइयों को गुड़गांव पुलिस से शिकायत है कि वह उन्हें उतनी सुरक्षा मुहैया नहीं देती, जितनी जरूरी है।
आए दिन वहां होने वाली वारदात से यहां के उद्यमी बेहद परेशान हैं। इसके बाद ही आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन नेे यहां की औद्योगिक इकाइयाें की मदद से चार साल पहले निजी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए थे। लेकिन अब इसका खर्च वहन करने को तैयार नहीं। आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी का कहना है कि निजी सुरक्षा पर खर्च तो बहुत हो रहा है मगर इसका लाभ नहीं मिल रहा है। चोरी, छिनैती और मारपीट की घटनाएं यथावत हैं। ऐसे में एसोसिएशन की सदस्य कंपनियां निजी सुरक्षा पर खर्च करने को तैयार नहीं।
मौजूदा निजी सुरक्षा एक नजर में
- 170 सुरक्षा गार्ड
- 10 पेट्रोलिंग बाइक
- चार पेट्रोलिंग गाड़ियां
अभी तक नहीं बना एडिशनल पुलिस स्टेशन
आईएमटी के सेक्टर-7 में तीन वर्ष पहले ही एडिशन पुलिस स्टेशन बनाने के लिए साइट निर्धारित कर दी गई थी। आईएमटी मानेसर इंडिस्ट्रयल एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश चंद ने कहा कि स्टेशन की बात तो दूर उसने नाम पर अभी तक एक भी ईंट नहीं गई है। अगर यहां पर पुलिस स्टेशन होता तो सुरक्षा की समस्या हद तक हल हो जाता।
सुरक्षा हटाने के अन्य कारण
-सुरक्षा गार्डों के साथ भी होती है मारपीट
-उनसे कोई डरता नहीं
-सुरक्षा गार्डों के पास किसी प्रकार के दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार नहीं
-पिछले काफी समय से सुरक्षा गार्डों के साथ हो चुकी हैं कई घटनाएं
-सुरक्षा करने वाले स्वयं सुरक्षित नहीं
-निजी सुरक्षा पर लगातार बढ़ता खर्च
-इन सुरक्षा कर्मियाें से औद्योगिक इकाइयों को ज्यादा उम्मीद नहीं
-चोरी, छिनैती और मारपीट की बढ़ती घटनाएं
-सुरक्षा करना पुलिस की जिम्मेदारी