चरखी दादरी। यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध में भारत के सैकड़ों युवाओं की जिंदगी खतरे में फंस गई है। रविवार को उन्हें यूक्रेन के नागरिकों का गुस्सा भी झेलना पड़ा। यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे दादरी निवासी आदित्य ने दिल्ली में रह रही बड़ी बहन अनुष्का से फोन पर बात करते हुए वहां के हालात साझा किए। बतौर अनुष्का, आदित्य ने कहा कि बाहर स्ट्रीट फाइट चल रही है जबकि बिल्डिंगों पर बम गिर रहे हैं। अब तो यूक्रेन के नागरिकों ने उन्हें फ्लैट से निकालना शुरू कर दिया है।
अनुष्का ने संवाद संवाददाता से हुई बातचीत में कहा कि सरकार और एबेंसी से जो मदद मिलनी चाहिए, वो नहीं मिल पा रही है। उसका भाई आदित्य केएनएम यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र है। वह गत अगस्त माह में ही एक माह की छुट्टी बिताकर यूक्रेन लौटा था। 25 फरवरी की उसकी फ्लाइट थी, लेकिन 24 को हुए हमले से हवाई सेवा बंद हो गई, जिस कारण वह वतन नहीं लौट सका।
बहन बच जाऊं तो मेरी किस्मत
अनुष्का ने बताया कि रविवार दोपहर आदित्य से बता हुई तो उसने कहा, बहन बच जाऊं जो मेरी किस्मत वरना जो हो उससे सब्र कर लेना। अनुष्का ने कहा कि उसके भाई की तरह ही देश के सैंकड़ों छात्र वहां फंसे हैं और मेरी सरकार और भारतीय दूतावास से अपील है कि उन्हें सबसे पहले यूक्रेन से निकालने का प्रबंध करे।
समय पर परिजनों ने बुलाया तो यूनिवर्सिटी ने नहीं दी इजाजत
यूक्रेन में एमबीबीएस कर रहे युवाओं के अभिभावकों से संवाददाता ने बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वो समय रहते अपने बच्चों को वापस बुला रहे थे। उस दौरान उन्हें यूनिवर्सिटी ने आने की अनुमति नहीं दी। करिअर की सोचते हुए बच्चे भी अनुमति मिलने का इंतजार करते रहे और इतनी देर हो गई कि वो वहां से निकल ही नहीं सके।
जानिए... किन गांवों के युवा फंसे हैं यूक्रेन में
बिगोवा निवासी निधि का परिजनों से टूटा संपर्क
बिगोवा निवासी निधि भी यूक्रेन में फंसी हुई है। वह भी खारकीव की केएनएम यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा है। चिंता का बात यह है कि निधि का परिजनों से संपर्क टूटा हुआ है। उसके साथ रहने वाले छात्रों ने परिजनों को बताया कि उन्हें एंबेसी ने जहां रोका है वहां से निधि करीब 70 युवाओं के टोल के साथ निकल गई। इसके बाद से परिजनों का उससे संपर्क नहीं हुआ है।
खारकीयू में फंसे भागवी निवासी बहन-भाई
भागवी निवासी पवन कुमार के दोनों बच्चे भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। पवन के अनुसार बेटा निशांत केएनएम यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस तृतीय वर्ष का छात्र है जबकि बेटी निशा एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है। गत 26 फरवरी को उनकी टिकट थी, लेकिन उससे पहले ही हवाई सेवा बंद हो गई। पवन ने बताया कि बच्चों के पास खाने का राशन नहीं है और फोन पर वो उनसे बात कर हालातों की जानकारी दे रहे हैं।
तीन रात से उड़ी है नींद, मन में बैचेनी
रिटायर्ड सूबेदार सुमेर सिंह ने संवाददाता से बातचीत में बताया कि उसका पोता कीव में फंसा हुआ है। जब से रुस ने हमला किया है उसकी नींद उड़ी हुई है। मन में बैचेनी है और स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया है। खुद दो लड़ाई लड़ चुका हूं लेकिन पोता मौत के साये में फंसा है। मेरी भारत सरकार से गुहार है कि बच्चों को सबसे पहले यूक्रेन से समीपवर्ती देशों के बॉर्डर के जरिये बाहर निकाले और उसके बाद स्वदेश वापसी करवाए।
दोनों बच्चे फंसे हैं, उनके पास खाना तक नहीं
तिवाला निवासी शमशेर सिंह ने बताया कि उसका बेटा-बेटी खारकीव की केएनएम यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए हुए हैं। बेटी फोर्थ ईयर की छात्रा है जबकि बेटा सेकंड ईयर में है। उनके पास अब खाना तक नहीं है। बंकरों में छिपकर वह अपनी जान बचा रहे हैं और सभी परिजनों बेहद चिंतित हैं। सरकार को वहां फंसे भारतीय विद्यार्थियों को रेस्क्यू कर भारत लाना चाहिए। डॉक्टर बनकर उन्हें देश की ही सेवा करनी है।
ढाणी फौगाट निवासी अमृता भी फंसी, 24 घंटे में मिल रहा खाना
ढाणी फौगाट निवासी बिजेंद्र ने संवाददाता से बातचीत में बताया कि उसकी बेटी अमृता भी खारकीव की केएनएम यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्रा है। वह हॉस्टल की बेसमेंट में है और वहां वॉश रूम तक की सुविधा नहीं है। चौबीस घंटे के अंतराल पर उन्हें थोड़ा बहुत खाना दिया जा रहा है। बिजेंद्र का कहना है कि सरकार यूक्रेन में फंसे बच्चों को जल्द से जल्द बाहर निकाले।