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Charkhi Dadri News: हिम्मत और जुनून से रेखा ने लांघी दिव्यांगता की लकीर, राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान

Mon, 08 Apr 2024 09:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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पदक दिखातीं चरखी दादरी के गांव मकड़ानी निवासी पैरा खिलाड़ी रेखा।
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चरखी दादरी। गांव मकड़ानी निवासी रेखा ने हिम्मत और जुनून से दिव्यांगता की लकीर को लांघकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने पैरा तलवारबाजी समेत पैरा एथलीट में 14 पदक जीते हैं। हालांकि रेखा के मन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को पदक न दिला पाने की टीस भी है। अपनी मेहनत के बलबूते वो जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के पदक का खाता खोलेंगी।
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पैरा खिलाड़ी रेखा ने सोमवार को अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके पिता जगदीश सिंह ईंट भट्ठे पर काम करके घर का गुजारा चलाते थे। वे दो बहन और दो भाई हैं। रेखा परिवार में सबसे छोटी है। वहीं जन्म के एक साल बाद ही पोलियो की चपेट में आने से उसके आधे शरीर ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद उनके पिता ने बाहर काम करना भी बंद कर दिया और घर पर उनकी मां संतोष देवी के साथ मिलकर मिट्टी के बर्तन बनाने शुरू कर दिए।
रेखा ने बताया कि 16 साल तक उनकी मां उसे गोद में उठाकर घूमती रही और हर जगह इलाज कराने का प्रयास किया। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। रेखा ने स्नातकोत्तर तक पढ़ाई की हुई है। उन्होंने बताया कि खेलों में आना कोई उद्देश्य नहीं था। करीब 8 साल पहले रेखा नौकरी की तलाश में पंचकूला गई थी। वहां नौकरी न मिलने कारण हताश हो गईं। इसके बाद किसी ने उन्हें बताया कि दिव्यांग युवाओं के खेल भी होते हैं। इसके बाद रेखा ने उन खेलों को देखा व तैयारी शुरू कर दी।
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- ट्रायल में जीते पदक तो बढ़ा मनोबल
रेखा ने बताया कि वर्ष 2016 में वो पैरा एथलीट की ट्रायल देने पंचकूला पहुंच गई। वहां दो कांस्य पदक और एक रजत पदक जीता। इससे आत्मविश्वास बढ़ गया और हताशा दरकिनार कर अपने रूचि खेलों में पैदा की। रेखा ने साल 2018 तक डिस्कस व जैवलिन थ्रो में कुल सात पदक हासिल किए। बाद में 2019 में उनकी डी ग्रुप में नौकरी लग गई और उन्होंने खेलना बंद कर दिया।

- वर्ष 2021 में शुरू की तलवारबाजी
रेखा ने वर्ष 2021 में तलवारबाजी से नई शुरुआत की और अब चार साल में सात पदक जीत लिए हैं। रेखा ने एथलीट की तैयारी रोहतक और तलवारबाजी की तैयारी दिल्ली से की है। अब वो बहादुरगढ़ में कार्यरत हैं और खेलों में भी नाम कर रही हैं। अब रेखा ने ओलंपिक में देश को पदक दिलाना ही लक्ष्य बनाया है।



- इन स्पर्धाओं में दिखा चुकीं खेल कौशल

रेखा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2018 में उन्होंने पेरिस में आयोजित एथलीट व्हीलचेयर इवेंट में भाग लिया। इसके बाद 2022 में थाइलैंड में आयोजित तलवारबाजी चैंपियनशिप में और 2023 में चाइना में आयोजित एशियन गेम्स में अपना हुनर दिखाया। लेकिन इनमें रेखा पदक नहीं जीत पाई। इसके अलावा उन्होंने बास्केटबाॅल व स्वीमिंग में भी भाग लिया। वो बास्केटबाॅल में रेखा हरियाणा टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं।
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ये हैं रेखा की उपलब्धियां

- 2016 में पंचकूला में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलीट चैंपियनशिप में एक रजत व दो कांस्य पदक।

- 2017 में जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलीट चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक।

- 2018 में पंचकूला में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलीट चैंपियनशिप में एक स्वर्ण व एक रजत पदक।

- - 2022 में ओडिसा में आयोजित राष्ट्रीय व्हीलचेयर तलवारबाजी स्पर्धा में एक स्वर्ण, दो रजत व एक कांस्य पदक।

- 2023 में करनाल में आयोजित राष्ट्रीय व्हीलचेयर तलवारबाजी चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक।

- 2024 में तमिलनाडु में आयोजित राष्ट्रीय व्हीलचेयर तलवारबाजी चैंपियनशिप में एक कांस्य पदक।
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