फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संसाधनों की कमी से जूझ रहा जन स्वास्थ्य विभाग, सीवर-पेयजल व्यवस्था बेपटरी

विज्ञापन
विज्ञापन
चरखी दादरी। जिला का जन स्वास्थ्य विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। न तो सीवर कर्मचारियों के लिए किट की व्यवस्था है और न ही सिलिंडर आदि की अन्य सुविधाएं हैं। जिले में करीब 500 कर्मचारी हैं, जिनमें 300 कच्चे व 164 फिल्ड कर्मचारी शामिल हैं। करीब 30 कर्मचारी कार्यालय का कामकाज संभालते हैं। सीवर के मात्र 27 कर्मचारी हैं, जबकि 60 कर्मचारियों की जरूरत है। वहीं, पानी साफ करने के लिए रेपिड फिल्टर की मात्र 40 प्रतिशत ही दक्षता है। विभाग के मुखिया एक्सईएन का पद भी खाली है और हिसार के एक्सईन को अतिरिक्त चार्ज सौंप रखा है।
विज्ञापन

शहर की सीवर व पेयजल व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। दोनों समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए अमृता-दो के तहत करीब 100 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट तैयार कर मुख्यालय भेजे जा चुके हैं। पिछले करीब तीन माह से प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है और शहर के करीब 80 हजार लोग परेशानियों का दंश झेल रहे हैं। सीवर व पेयजल के प्रोजेक्ट परवान चढ़ने के बाद ही इन समस्याओं का समाधान हो पाएगा और तब जाकर लोगों को राहत मिलेगी।
दूसरी ओर संवाददाता की पड़ताल में जन स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की कमी भी आड़े आई है, जो व्यवस्थाएं बेपटरी होने का मुख्य कारण हैं। सीवर व्यवस्था बेपटरी होने का कारण मुख्य कारण शहर में सीवरमैन की कमी है। विभाग के पास करीब 30 फीसदी ही सीवरमैन हैं जबकि 60 कर्मचारियों की और जरूरत है। इसके अलावा विभाग के संसाधनों के बेडे़ में सीवर लाइनों की सफाई के लिए मशीनें शामिल करने की भी दरकार है। अहम बात यह है कि सीवर व्यवस्था को कायम रखने के लिए जो कर्मचारी भर्ती हैं, वो सभी अनुबंध पर हैं।
विज्ञापन

- सीवर कर्मियों के पास जीवन रक्षक सुविधाएं नहीं
सीवर कर्मचारियों के पास जीवन रक्षक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इन कर्मचारियों के पास सीवर सेफ्टी किट नहीं हैं। किट में सिलिंडर, मास्क, दस्ताने, हेलमेट व अन्य संसाधन शामिल हैं। ऐसे में कर्मचारियों को जान जोखिम में डालकर कार्य करना पड़ता है। गत दिनों ही हिसार में एक हादसा हो चुका है, जिसमें चार कर्मचारियों को जान गंवानी पड़ी।
- पेयजल की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रेपिड फिल्टर को बदलने की जरूरत
गुणवत्तापरक एवं शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए मेन जलघर के 25 साल पुराने रेपिड फिल्टर को बदलने की जरूरत है। इसकी क्षमता पांच एमएलडी लीटर की है। इसके अलावा जलघर में आठ सामान्य फिल्टर लगे हैं, जिनमें रोडी व बजर आदि डालकर पानी को साफ करने की प्रक्रिया की जाती है। पानी साफ करने की आधुनिक तकनीक के फिल्टर लगाए जाने की जरूरत है।
- मोटरें व पंप 50 साल पुराने -
जलघर में मोटरें व पंप करीब 50 साल पुराने हैं, जिनकी पानी की उठान क्षमता मुश्किल से 40 प्रतिशत बची है। इसके चलते प्रेशर की समस्या बनी हुई है। मेन जलघर में दो मोटर 100 एचपी की लगी हैं। इसी प्रकार एक मोटर 125 हॉर्सपावर, दो मोटर 75 हॉर्सपावर की व एक मोटर 150 हॉर्स पावर की लगी हुुई है। इन मोटरों को भी बदलने की सख्त जरूरत है।
==उपभोक्ताओं के पास बिल भी नहीं पहुंच रहे -
कर्मचारियों की कमी की वजह से पेयजल उपभोक्ताओं के पास बिल भी नहीं पहुंच रहे हैं। सीमित उपभोक्ता खुद ही कार्यालय में जाकर बिल राशि जमा करवाने पहुंचते हैं। एक या दो माह में पानी के बिल उपभोक्ता के घर तक पहुंचाने की जरूरत है। वहीं, आबादी के लिहाज से पेयजल आपूर्ति के लिए इस समय शहर को एक और जलघर की जरूरत है। इस समय मुश्किल से 12 दिन की स्टोरेज क्षमता है, जबकि नहरों में पानी 24 दिन में पहुंचता है ऐसे में शेष दिन पानी का संकट बना रहता है।
वर्जन ::
वाटर टैंकों के निर्माण के लिए मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। फिल्टर सिस्टम को भी नया रूप दिया जाएगा। जलघर में मोटरें व पंप को भी हम जल्द अपडेट कर देंगे।
विज्ञापन

- एसके त्यागी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें