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दर्द: यूक्रेन में देखे मौत और तबाही के मंजर को नहीं भूल पाएंगे ताउम्र

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शमशेर सिंह अपने बेटा-बेटी के साथ। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। युद्ध के चलते यूक्रेन में फंसे जिले के कई युवाओं की वीरवार को घर वापसी हो गई। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे परिजनों की अपने बेटा-बेटी को देखकर आंखें नम हो गईं और एयरपोर्ट पर ही माता-पिता अपने बच्चों को गले लगाकर रो पड़े। वहीं, उन युवाओं ने भी यूक्रेन में बने विकट हालातों का दर्द साझा किया। स्वदेश वापसी करने वाले इन युवाओं ने कहा कि वहां मौत और तबाही का ऐसा मंजर देखा है कि ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। इन युवाओं के घर पहुंचते ही पड़ोसी भी कुशल क्षेम जानने पहुंच गए।
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बुधवार तक की बात करें तो यूक्रेन में जिले के 36 युवा फंसे थे। इनमें से तिवाला निवासी शमशेर के बेटा-बेटी, दादरी निवासी जसबीर का बेटा आदित्य, बिगोवा निवासी देवेंद्र की बेटी निधि वीरवार को सुरक्षित भारत पहुंच गए। दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट पहुंचने से करीब दो घंटे पहले ही परिजन वहां पहुंच गए और एयरपोर्ट के बाहर ही इंतजार करने लगे। ज्यों ही इन परिजनों को बच्चे एयरपोर्ट से बाहर निकलते नजर आए, वो अपनी भावनाएं नहीं रोक पाए और आगे बढ़कर अपने बच्चों को गले लगा लिया। बिगोवा निवासी निधि पिता देवेंद्र के गले लगकर भावुक हो गई, तो दादरी निवासी आदित्य भी पिता के गले लगने से खुद को नहीं रोक पाया। तिवाला निवासी शमशेर सिंह ने बताया कि बेटा-बेटी को सुरक्षित देखकर उसने भगवान का शुक्रिया अदा किया।
घर पहुंचते ही निधि बोली: मां बहुत भूखी हूं, खाना दे दो
वीरवार को घर वापसी करने वाली बिगोवा निवासी निधि के भाई निशांत ने बताया कि उसकी बहन के घर पहुंचते ही सबसे पहले मां और फिर अन्य परिजनों ने गले लगाया। निधि ने घर आते ही सबसे पहले कहा कि मां मैं भूखी हूं, खाना ला दो। निशांत के अनुसार मां रंजना ने उसकी बहन के लिए मटर-पनीर बनाया और खाना खाते ही निधि सो गई।
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पिता के गले लग बोला आदित्य : मौत के मुंह से निकल आया मैं
वार्ड-20 निवासी आदित्य भी यूक्रेन में फंसा हुआ था। वो खारकीव में था और उसकी पोलैंड बॉर्डर के जरिये वापसी हुई है। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही आदित्य पिता जसबीर के गले मिला। आदित्य की बहन अनुष्का ने बताया कि उसके भाई ने पिता के गले लगते ही कहा कि पापा मैं मौत के मुंह से निकल आया हूं। एक बार तो जिंदा रहने की उम्मीद टूट गई थी।
बेटा-बेटी को सुरक्षित देखकर पिता शमशेर की आंखों से छलके आंसू
तिवाला निवासी शमशेर सिंह के बेटा और बेटी भी यूक्रेन में फसे थे। वो खारकीव स्थित केएनएम यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। शमशेर सिंह बेटा-बेटी को लेने सुबह ही एयरपोर्ट पहुंच गए थे। जैसे ही उनके दोनों बच्चे बाहर आए तो शमशेर सिंह की आंखों से आंसू छलक गए। उन्होंने दोनों को गले से लगाया। शमशेर ने कहा कि बच्चों को देखकर जो खुशी हुई उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते।
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