चरखी दादरी। जिला मुख्यालय पर जल्द ही स्वास्थ्य विभाग सीटी स्कैन, एमआरआई और डायलिसिस की सुविधा करने जा रहा है। अब ये सभी सुविधाएं सिविल अस्पताल की जगह एमसीएच (मातृ-शिशु अस्पताल) में मुहैया करवाई जाएंगी। इन सेवाओं को शुरू करने पर करीब 30 लाख रुपये का बजट खर्च होने की उम्मीद है। इसका एस्टिमेट तैयार करने के लिए हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मई के मध्य तक एमसीएच में ये सेवाएं शुरू करने की योजना है, ताकि इसके बाद मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल और रोहतक पीजीआई के चक्कर न लगाने पड़े।
दादरी को जिला मुख्यालय बने साढ़े पांच साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक यहां जिला स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं की कमी बनी हुई है। धीरे धीरे विभाग इन कमियों को दूर करने के लिए प्रयासरत है। इसी कड़ी में अब एमआरआई, सटी स्कैन व डायलिसिस सुविधा शुरू करने की योजना तैयार की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले ये सेवाएं सिविल अस्पताल में शुरू करने की योजना थी, लेकिन मुख्यालय के आदेश अनुसार इसका स्थान बदलकर अब मातृ-शिशु अस्पताल किया गया है। ये तीनों सुविधाएं एमसीएच में मुहैया करवाने के लिए पीडब्ल्यूडी को एस्टिमेट तैयार करने के लिए पत्र लिखा गया है।
फिलहाल दादरी जिले में यह सुविधा नहीं है और इसके चलते प्रतिदिन चार से पांच मरीज भिवानी रेफर किए जाते हैं। इस लिहाज से एक माह में करीब 150 मरीजों को सिटी स्कैन, एमआरआई और डायलिसिस के लिए रेफर किया जाता है। अगर यह सुविधा में दादरी में ही शुरू हो जाए तो फिर मरीजों को रेफर करने के झंझट से छुटकारा मिलेगा।
इस स्थिति में होती है डायलिसिस की जरूरत
किडनी संबंधित मरीजों को डायलिसिस की जरूरत होती है। डायलिसिस में चार घंटे का समय लगता है। किडनी रक्त को साफ करने का काम करती है और खराब तत्वों को यूरिन के माध्यम से बाहर निकालती है। मगर कई बार ब्लड यूरिन बढ़ जाता है, जिससे किडनी संबंधित बीमारियां बनती हैं। डायलिसिस से ब्लड यूरिया को नियंत्रित किया जाता है।
सिटी स्कैन, डायलिसिस व एमआरआई की सुविधा मातृ-शिशु अस्पताल में शुरू की जाएगी। इसका एस्टीमेट तैयार करने के लिए हमने पीडब्ल्यूडी से पत्राचार किया है। एस्टिमेट आते ही बजट के लिए फाइल मुख्यालय भेज देंगे। - डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, चरखी दादरी