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मानसून : 107 एमएम बारिश से बचा 15 करोड़ का डीजल, किसान बोले- रामजी नै करदी मौज

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बारिश होने के बाद खेत में लहलहाती फसल। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। खरीफ सीजन में मानसून की अच्छी बारिश होने से जिले के 62 हजार किसानों को राहत मिली है। बारिश के कारण फसलों में सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। इससे किसानों को करीब नौ करोड़ रुपये की बचत होगी। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर है। इस बार जिले का बिजाई का रकबा भी बढ़ने के आसार बन गए हैं।
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जिले में खरीफ की फसलों के रूप में अधिकतर किसान बाजरा, ग्वार, ज्वार, कपास, मूंग आदि की ज्यादा मात्रा में बिजाई करते हैं। मानसून की औसत बारिश होने से फसलों में अब सिंचाई की जरूरत नहीं है। मई माह में किसानों ने सिंचाई करके ही कपास की बिजाई की थी। उस दौरान काफी क्षेत्र बिना बिजाई के भी रह गया था। दो से चार जून को हुई 20 एमएम बारिश में वंचित रहे किसानों ने बाजरा व ग्वार की फसलों की बिजाई कर दी थी।
बाढड़ा बाढड़ा क्षेेत्र रेतीला, होती है बिजली चालित ट्यूबवेल से सिंचाई
जिला का बाढड़ा क्षेेत्र रेतीला है। इसमें तो बिजली चालित ट्यूबवेल से सिंचाई की जाती है। यहां किसानों को फव्वारा सिस्टम से सिंचाई करनी पड़ती है। चरखी दादरी ब्लॉक के क्षेत्र में नहरें भी गुजरती हैं, लेकिन नहरी पानी की जिले में सदैव कमी ही बनी रहती है। नहरों पर सरकारी मोगों की संख्या भी काफी कम है, जिससे सिंचाई की व्यवस्था नहीं बन पाती। इससे किसान नहरी पानी की चोरी करने को विवश हो जाते हैं। किसान नहरों पर इंजन व ट्रैक्टर मशीन आदि लगाकर पानी का उठान करते रहे हैं। इस बार जुलाई में जिले में करीब 107 एमएम बारिश हुई है जिसके चलते किसानों को ट्रैक्टर या इंजन चलाकर सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ी।
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ऐसे हुई नौ करोड़ रुपये की बचत
एक बार की सिंचाई में प्रति एकड़ कम से कम 15 लीटर डीजल की खपत होती है। इस लिहाज से एक एकड़ की सिंचाई पर करीब 1500 रुपये खर्च आता है। जिले में करीब 30 हजार एकड़ पर पहले बिजाई हो चुकी थी, जबकि करीब 60 हजार एकड़ भूमि पर बाजरा और कपास समेत अन्य फसलों की कुछ समय पहले बिजाई गई थी। गत वर्ष 17 से 19 जुलाई तक तीन दिनों में हुई झमाझम बारिश से सिंचाई की कमी दूर हो गई है। करीब 60 हजार एकड़ भूमि पर सिंचाई न होने से किसानों का करीब नौ करोड़ रुपये का खर्च बचेगा।
प्रति एकड़ 15 लीटर डीजल की होती है खपत
किसान धर्मबीर सिंह उदय सिंह, हरज्ञान, मांगेराम, हवा सिंह व हरपाल का कहना है कि इस बार तो मानसून की बारिश बढ़िया कर रामजी नै मौज कर दी है। अब खरीफ की फसलों की सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। इन किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए प्रति एकड़ 15 लीटर डीजल की खपत हो जाती है।
बाजरा और कपास का क्षेत्र इस बार ज्यादा
जिले में अब तक बाजरा की बिजाई 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र से ज्यादा में हो चुकी है। अब बारिश होने के बाद भी किसान शेष भूमि पर बिजाई करेंगे। अभी बाजरा की बिजाई का समय बचा है। इसी प्रकार कपास भी 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी है। इस बार मानसून बारिश बढिय़ा होने की वजह से बिजाई का यह रकबा बढ़ने के आसार हैं क्योंकि बरानी एरिया में बारिश से ही बिजाई होती है।
जुलाई में ये रही है बारिश की स्थिति
तारीख- बारिश (एमएम में)
12 जुलाई -6
13 जुलाई-3
14 जुलाई-7
18 जुलाई-55
19 जुलाई-36
बारिश से इस बार आने वाले समय में औसत पैदावार पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। बारिश के पानी में फसल के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। फसलों की वृद्धि एवं विकास तेज गति से होता है। किसानों को बारिश से लागत में बचत हुई है।
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डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि विशेषज्ञ एवं तकनीकी सहायक
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