चरखी दादरी। कारगिल युद्ध में मातृभूमि पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले ये वीर बलिदानी बेशक आज हमारे बीच नहीं हैं मगर इनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में बसी हैं। कारगिल के ये सभी शहीद साहस और युद्ध कौशल की मिसाल हैं। पूरा देश आज इन पर वर्ग कर रहा है। ये शहीद खासकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। अब तक जिले में 117 जवान शहादत दे चुके हैं और बांस निवासी गनर भूपेंद्र चौहान सबसे कम उम्र में शहादत देने वाले जवान हैं। जिले के कारगिल शहीदों पर अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट...
शहीद जगदीश की पत्नी बोलीं : बेटे को आईएएस बना पति का सपना करूंगी साकार
जिले के गांव भागवी निवासी शहीद जगदीश कुमार 26 फरवरी 2000 को शहीद हुए थे। उनकी शहादत के बाद 11 अक्तूबर 2000 को शहीद की पत्नी ने पुत्र जंगवीर को जन्म दिया था। शहीद का पुत्र जंगवीर आईएएस अधिकारी बनकर राष्ट्रसेवा करना चाहता है। यह सपना इनके पिता जगदीश ने देखा था। इस सपने को पूरा करने के लिए मां बबीता ने अब ठान ली है। शहीद की पत्नी बबीता का कहना है कि वे बेटे को आईएएस बनाकर अपने पति के सपने को अवश्य साकार करेंगी। शहीद जगदीश कुमार फुटबाल के खिलाड़ी थे। वे खेल कोटे से ही फरवरी 1995 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वे जाट रेजीमेंट के जवान थे और कारगिल ऑपरेशन के दौरान वो 34 आरआर रेजीमेंट में जम्मू कश्मीर क्षेत्र के बारामूला के गनीबाबा क्षेत्र में तैनात थे।
राजकुमार को प्रेरणास्रोत मानते हैं युवा
गांव रावलधी निवासी कारगिल शहीद राजकुमार 13 जून 1999 को कारगिल क्षेत्र में देश की रक्षा करते हुए मातृभूमि की गोद में सदा के लिए सो गए थे। उन्होंने शत्रु को पछाड़ते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए सीने में गोली खाई। राजकुमार में पढ़ाई के दौरान ही सेना में भर्ती होकर देशसेवा की भावना व्याप्त थी। आज भी सेना में जाने के इच्छुक गांव के युवा राजकुमार को प्रेरणास्रोत मानते हैं।
12वीं पास करते ही सेना में भर्ती हुए थे कुलदीप
गांव महराणा निवासी शहीद कुलदीप सिंह 18 जून 1999 में कारगिल ऑपरेशन के दौरान मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। कक्षा 12 वीं की परीक्षा पास करने के बाद वे भारतीय सेना में भर्ती हो गए थे। कुलदीप ने दुश्मन के दांत खट्टे कर मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। क्षेत्र के लोग जवान की शहादत को कभी भूला नहीं सकते। शहीद कुलदीप की शहादत पर गांव व क्षेत्र के लोगों को गर्व है।
17 मई 1999 को शहीद हुए थे मौड़ी निवासी राजबीर
जिले के गांव मौड़ी निवासी शहीद राजबीर सिंह की पत्नी कमलेश देवी ने बताया कि हवलदार राजबीर सिंह 17 मई 1999 को कारगिल क्षेत्र में मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। शहीद के दो बेटे हैं। पत्नी कमलेश देवी ने बताया कि शहीदों को सरकार की ओर से पूरा सम्मान मिलना चाहिए। शहीदों के बच्चों को सरकारी नौकरी में विशेष छूट दी जानी चाहिए।
आईएएस व एमबीबीएस कोटे में सीटें बढ़ाने की मांग
कारगिल शहीद के परिजनों ने केंद्र सरकार की सभी श्रेणी की सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान नहीं करने पर नाराजगी जाहिर की है। शहीद के परिजनों ने भारतीय रेल सेवा में भी सभी श्रेणी की ट्रेनों में सौ फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग की है। इस समय कारगिल शहीदों को स्लीपर की गाड़ियों में 75 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। शहीद परिजनों ने आईएएस व एमबीबीएस कोटे में भी सीटें बढ़ाने की मांग सरकार से की है।
शहीद जगदीश की पत्नी अपने बेटे जंगवीर के साथ।- फोटो : CharkhiDadri