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इधर...गबन की जांच के लिए गठित एसआईटी जुटा रही चेक का ब्योरा

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झोझूकलां स्थित खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। बिल्ली को दूध की रखवाली बैठाने की कहावत तो आपने सुनी होगी। यह कहावत ग्राम सचिवों के गबन के मामले सामने आने के बाद चरखी दादरी जिला पंचायत विभाग पर सटीक बैठ रही है। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद से ही ग्राम सचिवों के पास चार्ज है और इस मौके का फायदा उठाकर ग्राम सचिव पंचायतों के खातों को खाली कर रहे हैं। पिछले एक माह में ग्राम सचिवों के गबन की जिले के बाढड़ा और झोझूकलां थाने में चार एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। हाल ही में झोझूकलां थाना पुलिस ने ग्राम सचिव राजेश के खिलाफ धारा 120-बी, 409, 420, 467, 468 व 471 के तहत केस दर्ज किया है। उक्त ग्राम सचिव पर 81 लाख 36 हजार रुपये के गबन का आरोप है।
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फरवरी 2021 में प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इसके बाद से ही बीडीपीओ प्रशासक नियुक्त हैं, जबकि ग्राम सचिवों की देखरेख में कार्य हो रहे हैं। ग्राम सचिवों ने फर्जी प्रस्ताव और बीडीपीओ के फर्जी हस्ताक्षर कर ग्राम पंचायतों के फंड से फर्मों के खातों में अदायगी की है, जबकि ये कार्य धरातल पर करवाए ही नहीं गए हैं। इस साल एक और दो फरवरी को बाढड़ा थाने में ग्राम सचिव मुकेश समेत बैंक के अज्ञात कर्मचारी व फर्म संचालक के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। ग्राम सचिव मुकेश द्वारा बाढड़ा की 15 ग्राम पंचायतों में फर्जीवाड़ा करने की बात सामने आई थी।
तीन ग्राम सचिवों ने 85 चेक इस्तेमाल कर 3.38 करोड़ निकाले
अब तक ग्राम सचिव मुकेश, अमित व राजेश के गबन करने का खुलासा हुआ है। ग्राम सचिव मुकेश ने जहां 37 चेक इस्तेमाल कर एक करोड़ 65 लाख का गबन किया तो वहीं ग्राम सचिव अमित ने 31 चेक लगाकर 91 लाख 79 हजार और ग्राम सचिव राजेश कुमार ने 17 चेक के जरिये 81 लाख 36 हजार की गबन किया। ऐसे में इन ग्राम सचिवों ने 85 चेक पर बीडीपीओ के फर्जी हस्ताक्षर कर कुल तीन करोड़ 38 लाख रुपये का गबन किया है।
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एक ही तरीके से किए गए गबन
इसके बाद झोझूकलां खंड के ग्राम सचिवों के गबन के दो मामले सामने आए हैं। एक मामले में ग्राम सचिव अमित के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, जबकि अब दूसरे ग्राम सचिव राजेश पर भी एफआईआर दर्ज हुई है। ग्राम सचिव अमित ने करीब 91 लाख 79 हजार की गबन किया तो ग्राम सचिव राजेश पर 81 लाख 36 हजार का गबन करने पर मामला दर्ज हुआ है। अब तक जो ग्राम सचिवों पर चार एफआईआर दर्ज हुई हैं, उनमें एक ही तरीके से गबन करने की बात सामने आई है। इन चारों एफआईआर में बैंक कर्मचारी और फर्म संचालकों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
बाढड़ा पंचायत विभाग से करोड़ों के विकास कार्यों का रिकॉर्ड ही गायब
ग्राम सचिव मुकेश का गबन उजागर होने के बाद जब लेखा शाखा के रिकॉर्ड की जांच की गई तो अधिकारियों को करोड़ों के विकास कार्यों का रिकॉर्ड ही गायब मिला। इस पर संज्ञान लेने हुए सात तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों को पत्र लिखकर रिकॉर्ड समेत पेश होने के लिए पत्र लिखा गया था, लेकिन ज्यादातर ने इस पर संज्ञान नहीं लिया और तय समय तक दो ही कर्मचारी विभाग कार्यालय में पेश हुए।
ग्राम सचिव राजेश कुमार के खिलाफ मैंने पुलिस को शिकायत दी है जिसके आधार पर केस दर्ज किया जा चुका है। ग्राम सचिव अमित ने करीब 81 लाख 36 हजार रुपये का गबन किया और 17 चेक के जरिये फर्मों के खातों में अदायगी की। इस प्रक्रिया में मेरे फर्जी हस्ताक्षर किए गए। - सुभाषचंद्र, बीडीपीओ, झोझूकलां।
झोझूकलां बीडीपीओ ने ग्राम सचिव अमित के खिलाफ एक गबन की शिकायत दी थी। इस संबंध में पुलिस ने धारा 120-बी, 406, 420, 467, 468 व 471 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। - विजयपाल, एसआई, झोझूकलां थाना
बाढड़ा खंड के ग्राम सचिव के किए गबन की जांच के लिए गठित एसआईटी जुटा रही चेक का ब्योरा
बाढड़ा गांव के ग्राम सचिव मुकेश द्वारा किए गए गबन मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। एसआईटी फिलहाल उन चेक का ब्योरा जुटा रही है, जिनके जरिये फर्मों के और अन्य खातों में राशि की अदायगी की गई है। चेक जुटाने के बाद इन्हें जांच के लिए एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री) मधुबन भेजा जाएगा, ताकि ये पता चल सके कि चेक पर किए गए हस्ताक्षर किसके हैं।
गौरतलब है कि गत एक मार्च को बाढड़ा खंड में तैनात ग्राम सचिव मुकेश के खिलाफ ततत्कालीन बीडीपीओ युद्धवीर सिंह ने गबन का केस दर्ज करवाया था। इसके अगले दिन ही मौजूदा बीडीपीओ रोशनलाल ने ग्राम सचिव मुकेश पर दूसरी एफआईआर दर्ज करवाई थी। पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत ने इस मामले की जांच के लिए गत 20 मार्च को ही एक एसआईटी गठित की थी। चार सदस्यीय एसआईटी की कमान बाढड़ा डीएसपी देशराज सिंह को दी गई है और इसमें बाढड़ा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर चंद्रशेखर, पीएसआई संदीप व आर्थिक अपराध शाखा प्रभारी कप्तान सिंह को शामिल किया गया है।
एसआईटी ने अपनी जांच शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर चंद्रशेखर ने बताया कि एसआईटी द्वारा पंचायत के चेकों को इक्ट्ठा किया जा रहा है और उन पर किसके हस्ताक्षर है, इसकी भी जांच की जा रही है। सभी चेक जुटाने के बाद इन्हें जांच के लिए एफएसएल के पास भेजा जाएगा। चेक पर किए गए हस्ताक्षर का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि ये हस्ताक्षर बीडीपीओ के है या नहीं। इसके बाद अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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