चरखी दादरी। करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में लगातार दूसरे दिन रविवार को किसानों ने रोष जताया। किसान सड़क पर उतरे और शहर में प्रदर्शन कर सरकार को चेताया कि वे लाठीचार्ज से डरने वाले नहीं है। समय आने पर इसका जवाब दिया जाएगा और कृषि कानून रद्द होने तक वे किसी सूरत में आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
लाठीचार्ज के विरोध में किसान, मजदूरों के अलावा विभिन्न संगठनों और खापों से जुड़े लोग सुबह करीब 10 बजे रोज गार्डन में जुटे। यहां जनसभा कर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की। रोष सभा के बाद करीब करीब 11 बजे जुलूस के रूप में प्रदर्शन करते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और नारेबाजी कर रोष जताया। उपायुक्त की अनुपस्थिति में किसानों ने एसडीएम डॉ. वीरेंद्र को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंप और डीएसपी करनाल को बर्खास्त करने की मांग की। किसानों के प्रदर्शन के चलते सड़क पर जाम जैसे हालात रहे। इस मौके पर फौगाट खाप के प्रधान बलवंत नंबरदार, श्योराण खाप के प्रधान बिजेंद्र बेरला, सुरेश फौगाट, प्रवीण चेयरमैन, शमशेर फौगाट, सुरजभान सांगवान, सुरेंद्र कुब्जानगर, कमलेश भैरवी, निर्मला पांडवान, सत्या लेघा, नितिन जांघू, उमेद पातुवास, जयभगवान मस्ताना, कृष्ण फौगाट, रणधीर घिकाड़ा, पूर्व सरपंच सोनू, दयानंद सरपंच, देवेंद्र लीला, डॉ. चंदन, धर्मबीर नंबरदार आदि मौजूद थे।
विधायक बोले- एक एक लाठी का लिया जाएगा हिसाब
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रणसिंह मान, विधायक सोमबीर सांगवान, सांगवान खाप के सचिव नरसिंह सांगवान ने कहा कि सरकार घमंड में चूर है। आंदोलन में 650 से ज्यादा किसान शहादत दे चुके हैं। लेकिन अभी तक सरकार जिद पर अड़ी है। किसान-मजदूर के साथ की गई ज्यादती सरकार को महंगी पड़ेगी और उनके बदन पर पड़ी एक एक लाठी का हिसाब लिया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि लाठीचार्ज ने अंग्रेजों के शासनकाल की याद ताजा करा दी। सरकार जितने मर्जी जुल्म कर ले, लेकिन हमारे हौसले कम नहीं कर सकती।