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भावनाओं के भवन की बुनियाद है हिंदी

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आर्य स्कूल में आयोजित विचार गोष्ठी में विचार रखती छात्रा। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हिंदी है भारत के गौरव की बिंदी विषय पर शनिवार को आर्य वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इसका शुभारंभ प्रधानाचार्य परमेंद्र चित्तौड़िया ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को आयोजन के उद्देश्य की जानकारी दी और अमर उजाला की हिंदी हैं हम मुहिम से जुड़ने की अपील की।
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उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य पंक्ति निज भाषा उन्नति को मूल, बिन निज भाषा के मिटे न हिय को सूल के माध्यम से कहा कि हिंदी हम भारतीयाें के हृदय मंथन से निकली भाषा है। यह सहज व सरल रूप से हमारी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि हिंदी का व्याकरण पूर्णता वैज्ञानिकता को संजोए हुए हैं। अपनी सरलता, सहजता व लोकप्रियता के बलबूते विज्ञापन के बाजार में भी हिंदी सर्वश्रेष्ठ स्थान बनाए हुए है। साहित्य के साथ-साथ संगीत कला, संवाद कला के माध्यम से आज उत्तर दक्षिण की सारी बाधाएं टूटती जा रही हैं और हमें हिंदी होने का गर्व है।
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विचार गोष्ठी की अध्यक्षता हिंदी प्राध्यापक बिशन सिंह आर्य ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल हमारी राष्ट्रीय भाषा ही नहीं है अपितु हमारी भावनाओं के भवन की बुनियाद है। स्वाधीनता संग्राम के अग्रिम पंक्ति के महापुरुषों व क्रांतिकारियों ने भी हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में अपनाकर पुस्तक, गंथ व पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। इसमें महर्षि दयानंद का सत्यार्थ प्रकाश, बंकिम चंद्र चटर्जी का आनंद मठ, महात्मा गांधी हिंद स्वराज नामक ग्रंथ विशेष हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी कश्मीर से कन्याकुमारी व गुजरात से आसाम तक संपूर्ण देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाली भाषा है। अंत में सभी विद्यार्थियों ने हिंदी के प्रसार-प्रचार का संकल्प लिया।
छात्राएं बोलीं- नई भाषाएं सीखने से हिंदी के प्रति कम नहीं होगा लगाव
हिंदी भारत की मातृभाषा है जो अत्यंत ही सरल है। इसकी लिपि देवनागरी है। मैं एक विद्यार्थी होने के नाते नई-नई भाषाओं को सीखना चाहती हूं, परंतु हिंदी के प्रति मेरा लगाव कोई भी भाषा बदल नहीं सकती है। मुझे भारतीय होने पर गर्व है।
-निकिता शर्मा, 12वीं कक्षा
हिंदी का महत्व बहुत अधिक है। मैं एक भारतवासी होने के नाते अपनी राष्ट्रीय भाषा हिंदी पर गर्व करती हूं। हिंदी एक सरल भाषा है। मुझे हिंदी से प्रेम है सिर्फ इसलिए नहीं कि मैं भारत की रहने वाली हूं बल्कि यह मेरे प्रत्येक कार्य एवं अंग से जुड़ी है।
-रितू, 11वीं कक्षा
हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता मिली हुई है। अब हिंदी हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन गई है। हमें राष्ट्र भाषा के प्रचार के लिए आगे आना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी इस मुहिम से जुड़े और हिंदी को शिखर तक ले जाने में अपना सहयोग दे।
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मीनू कुमारी, 11वीं कक्षा
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