चरखी दादरी। स्वच्छ और पर्याप्त पानी के लिए कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके शहर वासियों के लिए अच्छी खबर है। विभाग ने शहर वासियों को पर्याप्त स्वच्छ जल मुहैया कराने की कड़ी में पहला कदम उठाते हुए शहर के लिए 3908.55 लाख का प्रोजेक्ट तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा है। जिसमें मुख्य फोकस स्वच्छ पानी पर किया है। इसके लिए चंपा पुरी जलघर में ही अलग से प्लांट लगेगा और बड़ा मीडिया फिल्टर सिस्टम लगा पानी को साफ किया जाएगा। इतना ही नहीं, अब तक नहर के पानी से टैंक नहीं भर पाने की समस्या को दूर करने के लिए भी प्लान बनाया है। इसके तहत नहरी पानी को टैंकों तक पहुंचाने के लिए अलग से बड़ा पंपिंग स्टेशन बनाया जाएगा, ताकि अगर नहर में 15 दिन पानी आता है तो तुरंत ही टैंकों को भरा जा सके। अब इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति और बजट जारी होने का इंतजार है, ताकि शहर वासियों की इन समस्याओं का समाधान हो सके।
शहर की करीब 80 हजार आबादी पिछले लंबे समय से पेयजल किल्लत से जूझ रही है। न स्वच्छ पानी मिलता है और न ही पर्याप्त पानी। परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग पर्याप्त स्वच्छ पानी के लिए मार्ग जाम, धरने के अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं। अभी तक भी पर्याप्त स्वच्छ पानी नहीं मिला है। इस कारण सप्लाई में पर्याप्त पानी नहीं आना, कम स्टोरेज क्षमता और शहर की वर्षों पुरानी क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को माना जा रहा है। अब इन्हीं के मद्देनजर जनस्वास्थ्य विभाग ने 3908.55 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार कर मुख्यालय भेजा है।
शहर में पेयजल का संकट हर मौसम में बना रहता है। शहर में पेयजल क्षमता कम होने की वजह से दिक्कत बन रही है। पानी की स्टोरेज क्षमता 3750 लाख लीटर, जबकि इस समय 7500 लाख लीटर की जरूरत है ताकि शहर में प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति हो सके। इस समय विभाग शहर में एक दिन छोड़कर पेयजल की आपूर्ति कर रहा है। दूषित पेयजल आपूर्ति की हर वार्ड से शिकायतें मिल रही हैं।
पांच दशक पुराने जलघर से पुराने ढर्रे पर हो रही सप्लाई -
नगर की चंपापुरी कॉलोनी में करीब पांच दशक पुराना जलघर है। यह जलघर पुराने ढर्रे पर ही चला आ रहा है। पानी को साफ करने के तौर तरीके पारंपरिक ही चले आ रहे हैं। रोड़ी, बजरी व दवा डालकर पानी को साफ किया जा रहा है। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग ने शहर के सभी सात बूस्टिंग स्टेशनों, जलघर, शहर में विभिन्न स्थानों पर लगे वाटर कूलर व घरों से अलग-अलग सैंपल लिए थे। इस पानी का बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट भिवानी लैब में करवाया था। जांच में सभी सैंपल फेल पाए गए थे। उसके बाद विभाग हरकत में आया था और पानी में नियमित रूप से क्लोरिन डाली गई और जलघर में भी दवा आदि डालकर सप्लाई किया जाने लगा। इस जांच में क्लोरिन की मात्रा भी शून्य मिली थी।
पानी में सभी तत्वों का संतुलित मात्रा में होना जरूरी : स्वतंत्र सिंह
विज्ञान के रिटायर्ड प्रवक्ता स्वतंत्र सिंह का कहना है पानी में न्यूट्रेंस के रूप में मुख्य तत्व ऑक्सीजन, आयरन, सल्फर, फ्लोराइड व फास्फेट के अलावा अन्य ऑर्गेनिक भी होते हैं। इनका संतुलित मात्रा में पानी में मौजूद होना जरूरी है। मानव शरीर में 75 प्रतिशत पानी जलवाष्प के रूप में बाहर निकलता है। ऐसे में पोषक युक्त पानी का सेवन ही फायदा पहुंचाता है। खारा पानी का सेवन करने से पेट संबंधी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। पेचिस रोग की भी शिकायत हो जाती है। शरीर में सोडिक की मात्रा बढ़ जाती है। आंत संबंधी रोगों को बढ़ावा मिलता है।
वर्जन:::
पेयजल आपूर्ति ही नहीं, पानी की गुणवत्ता पर भी फोकस किया गया है। जलघर में ही वाटर को ट्रीट कर सप्लाई किया जाएगा। हमने 3908.55 लाख का प्रोजेक्ट तैयार कर हेड ऑफिस भेज दिया है। मंजूरी जल्द ही मिलने की उम्मीद है। पेयजल आपूर्ति में भी सुधार होना है।
- एसडीओ जगदीशचंद्र, जनस्वास्थ्य विभाग।