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दस समस्याओं से शहर वासी परेशान,

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फोटो 01 ठप सीवर व्यवस्था के चलते सड़क पर भरा पानी। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। आज दशहरा है और इस बार शहरवासियों को दस समस्याओं रूपी रावण ने घेर रखा है। इनमें से कुछ समस्याएं तो ऐसी हैं जो लंबे समय से शहर वासियों के लिए आफत बनी है, लेकिन विभाग अब तक उनका समाधान नहीं कर पाए हैं। इन समस्याओं के निदान के लिए विभागों के अचूक बाण (सफल प्रयास) का शहरवासियों को इंतजार हैं। शहरवासी मुख्य रूप से सीवर, दूषित पेयजल आपूर्ति, बंदरों व लावारिस पशुओं, अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी, बदहाल सरकारी स्कूल भवनों, जर्जर सड़कों, पार्किंग की कमी, अतिक्रमण व जाम, नहरी पानी की कमी आदि समस्याओं से त्रस्त हैं। इन समस्याओं का स्थायी समाधान कर विभागों को जल्द शहर वासियों को राहत देनी चाहिए।
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जानिए.... कितने समय से बनी है कौन-सी समस्या
1: - ठप सीवर व्यवस्था: गत मानसून की बारिश से शहर में बने हालात किसी से छिपे नहीं है। वार्डों की गलियों और सड़कें ही नहीं, बल्कि बाजार भी जलमग्न हो गए थे। दुकानों और मकानों के अंदर तक पानी घुस गया था और यह सब ठप सीवर व्यवस्था की देन है। यह समस्या पिछले पांच सालों से शहर में बनी है। अब विभाग ने इसका मास्टर प्लान तैयार किया है। सीवर समस्या का दंश करीब 60 हजार की आबादी झेल रही है जबकि कुछ कॉलोनियों में व्यवस्था ठीक है।
2:- सीवर मिक्स व अपर्याप्त पेयजल आपूर्ति : पेयजल संकट शहर की मुख्य समस्या है। करीब 40 साल पुरानी लाइनें कंडम हो चुकी हैं और इनके चलते घरों में सीवरमिक्स पानी की आपूर्ति हो रही है। शहर की करीब 20 कॉलोनियों में यह समस्या है और 20 हजार की आबादी इस समस्या का लगातार दंश झेल रही है। वहीं, शहर के चार वार्डों में अपर्याप्त पेयजल आपूर्ति हो रही है जिससे करीब दो हजार की आबादी प्रभावित है। इसके अलावा शहर में प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति करने की भी मांग भी सिरे नहीं चढ़ी है।
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3:- बंदर व लावारिस पशु : शहर में बंदरों का खौफ लगातार बना हुआ है। बंदर पकड़ो अभियान पिछले आठ माह से बंद है। शहर की अगर बात करें तो 500 से अधिक बंदर इस समय हैं। पिछले एक साल के अंदर बंदर 100 से अधिक लोगों को अस्पताल पहुंचा चुके है। वहीं, दूसरी ओर लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान भी लंबे समय से बंद है। शहर में 600 से अधिक लावारिस पशु सड़कों पर हैं और इनके चलते लगातार हादसे भी हो रहे हैं। शहर से पकड़े गए गोवंश रखने के लिए नगर परिषद के पास जगह तक नहीं है।
4:- बदहाल स्कूल : मानसून की बारिश ने शहर के राजकीय स्कूलों की अव्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। बीस दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी राजकीय स्कूल से पानी की निकासी नहीं हो पाई हैं। इसके अलावा कोर्ट के पिछली तरफ स्थित प्राथमिक स्कूल भी बदहाल है। यहां भी कई दिनों तक पानी भरा रहा। राजकीय स्कूल बदहाल होने से शहर के ढाई हजार से ज्यादा विद्यार्थी परेशान हैं। खासकर राजकीय मॉडल संस्कृति में बनी जलभराव की समस्या का स्थायी विकल्प तलाशने की दरकार है।
5:- जर्जर सड़कें : मानसून की बारिश के बाद शहर की 10 करोड़ से अधिक की सड़कें पानी में बह गईं। जर्जर सड़कों का निर्माण करवाने की सख्त दरकार है। इन सड़कों का निर्माण नगर परिषद और पीडब्ल्यूडी की ओर से करवाया जाना है। नगर परिषद अधिकारी करीब एक करोड़ रुपये से सड़कों का निर्माण करवाने की योजना तैयार कर चुके हैं, लेकिन अब तक इसे सिरे नहीं चढ़ाया जा सका है। कई जगहों पर सड़कें धंस चुकी हैं जबकि कुछ सड़कें तो ऐसी हैं जिनसे तारकोल की परत ही गायब है।
6:- अतिक्रमण व जाम: शहर में अतिक्रमण का दायर लगातार बढ़ रहा है। एक दिन की कार्रवाई के बाद नगर परिषद अधिकारी पर इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। अतिक्रमण का दायरा बढ़ने से इसका असर सीधे तौर पर सड़कों की ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। उपायुक्त के अतिक्रमण हटाने के आदेश देने के बाद भी नगर परिषद अधिकारी अतिक्रमण हटाने की ओर ध्यान नहीं दे रहे। जाम और अतिक्रमण दोनों शहर की मुख्य समस्याएं हैं और इसके चलते वाहन चालकों के साथ राहगीर तक परेशान हैं।
7:- विशेषज्ञों की कमी: स्वास्थ्य विभाग के पास लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत सेवा भी शहरवासियों को सिविल या मातृ-शिशु अस्पताल में नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं सिविल अस्पताल और एमसीएचस में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाने की लंबे समय से मांग उठ रही है, लेकिन अभी तक विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हुई है और न ही अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत सुविधा शुरू करवाई है।
8- एक छत के नीचे नहीं विभागों की सुविधा : जिला स्तरीय लघु सचिवालय निर्माण की कवायद जल्द शुरू हो जाएगी, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने में डेढ़ से दो साल लग सकते हैं। फिलहाल शहरवासियों को सभी सरकारी विभागों की सुविधा एक ही छत के नीचे नहीं मिल पा रही है और उन्हें एक से दूसरे सरकारी विभाग में काम करवाने के लिए इधर-उधर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शहर में छह सरकारी विभागों के कार्यालय पिछले लंबे समय से किराये के भवनों में चल रहे हैं।
9- पार्किंग नहीं : बाजार में आने वाले वाहन चालकों के लिए कहीं भी प्रशासन की ओर से पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्राहक अगर दुकानों के बाहर सड़क पर खाड़ी करते हैं तो उनकी गाड़ी जब्त कर ली जा है। इस समस्या से वाहन चालकों के अलावा दुकानदार व व्यापारी भी परेशान हैं। इस समय केवल कोर्ट परिसर में ही पार्किंग की व्यवस्था है। सूत्रों के अनुसार पार्किंग बनाने के लिए प्रशासन के पास जगह नहीं है और इसके चलते इस समस्या का लंबे समय बाद भी समाधान नहीं हुआ है।
10- अनाधिकृत कॉलोनियां : शहर की अगर बात करें तो अधिकृत (एप्रूवड) कॉलोनियों में करीब 20 गलियां कच्ची हैं जबकि अनाधिकृत (अनअप्रूवड) कॉलोनियों में कच्ची गलियों की संख्या की अगर बात करें तो 50 से पार है। यहां रहने वाले लोग लंबे समय से कॉलोनी के अप्रूवड होने का इंतजार कर रहे हैं। इस समय करीब पांच हजार की आबादी अनअप्रूवड कॉलोनियों में रह रही है। इस आबादी को कई साल बाद भी शहर की तर्ज पर मूलभूत सुविधाएं मिले का इंतजार है। कुछ दिनों पहले सरकार की घोषणा के बाद इन लोगों में इसकी उम्मीद भी जगी है।
सीवर-पेयजल समस्याओं के स्थायी समाधान का प्रारूप तैयार हो चुका है और जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। मैं जनसमस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत हूं और जल्द ही शहरवासियों को इन विभिन्न समस्याओं से निजात दिलाने का मेरा प्रयास रहेगा।
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सोमबीर सांगवान, विधायक, दादरी विधानसभा हलका
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