अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के साथ, अब सभी कश्मीरियों को शिक्षा का अधिकार है। कश्मीरियों को अब सब कुछ जानने का अधिकार है क्योंकि देश एक झंडे और एक राष्ट्र के अधीन है। यह कानून अब कश्मीरियों को राज्य में स्थित संस्थानों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार देता है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को एक अस्थायी और अप्रभावी प्रावधान के रूप में देखा गया जिसे निरस्त करने की आवश्यकता थी। अनुच्छेद 370 के खत्म होने से कश्मीर के लोगों को मदद मिली है और वो शेष भारत में शामिल हो गए हैं। जम्मू और कश्मीर पूरी तरह से भारतीय संविधान और सभी 890 केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत आता है। उन्हें और भारतीयों दोनों को कश्मीर का हिस्सा बनने का अधिकार है। वे स्कूल के लिए छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने में सक्षम हैं।
कश्मीर में उनके लिए सरकारी रोजगार उपलब्ध हैं। समग्र रूप से भारत अब एकत्रित हो गया है। भारतीयों और कश्मीरियों के लिए कोई अलग संविधान नहीं है। सभी लोग एक राष्ट्र, एक संविधान के आदर्श वाक्य का पालन करेंगे। अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद, कश्मीरी भारतीयों की नव स्थापित फर्मों में काम कर रहें हैं और अच्छा पैसा कमा रहें हैं। अधिक नौकरियां पैदा करने से अनिवार्य रूप से अपराध कम हो रहें है।
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कश्मीरी अपनी जमीन पट्टे पर देकर आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहे हैं। निजी व्यापार मालिक कश्मीर में कारखाने स्थापित कर रहें हैं, जिससे कश्मीरियों और भारतीयों के लिए नौकरियां पैदा हो रही हैं। 40्र प्रतिशत कश्मीरियों के पास नौकरियों की कमी, घाटी में अपराध में वृद्धि का मुख्य कारण है। निजी निवेश से असामाजिक कृत्यों में कमी आएगी। जमीन की कीमतें बढ़ रही है, जिससे कश्मीरियों को महत्वपूर्ण लाभ मिल रहा है।
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के साथ, अब सभी कश्मीरियों को शिक्षा का अधिकार है। कश्मीरियों को अब सब कुछ जानने का अधिकार है क्योंकि देश एक झंडे और एक राष्ट्र के अधीन है। यह कानून अब कश्मीरियों को राज्य में स्थित संस्थानों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार देता है। आगे भी इस बात की 100 प्रतिशत संभावना है कि कश्मीर में निवेशकों के निवेश के परिणामस्वरूप घाटी में नए शैक्षणिक संस्थान खुलेंगे, इससे बच्चे, विशेषकर लड़कियां शिक्षित होंगी। - डॉ. सत्यवान सौरभ, , बड़वा (सिवानी) भिवानी, कवि, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार