भिवानी। करीब पौने चार लाख की आबादी वाले भिवानी शहर के अधिकांश इलाकों में गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। सर्दी में खपत कम होने के कारण पानी के दबाव ने पुरानी लाइनों की सेहत बिगाड़ दी है। लीकेज ठीक कराने के नाम पर भी विभाग ने 30 से अधिक जगहों पर गड्ढे खोदे हैं। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग शहरी पेयजल शाख के समक्ष रोजाना ही लीकेज व गंदे पानी से जुड़ी करीब 60 शिकायतें आ रही हैं। इनमें अधिकांश का तो समाधान भी नहीं हो पाता। बड़े मसौदों को लेकर बजट पर संशय बना है, क्योंकि ये कार्य अब अमृत द्वितीय फेज में ही होंगे।भिवानी शहर के अंदर अधिकांश इलाकों में पुरानी पेयजल लाइनें हैं, जिनकी वजह से लीकेज की समस्या अब बढ़ गई है। विभागीय अधिकारियों ने भी शहर के विभिन्न हिस्सों में लीकेज ठीक कराने के लिए लाइनों की जांच शुरू कर दी है। वहीं संभावित जगहों पर गड्ढे खोदकर उन्हें ठीक कराए जाने का काम भी शुरू कर दिया है।
कई जगह तो पेयजल लाइनों की लीकेज इतनी ज्यादा है कि आसपास के मकानों की नींव पर भी संकट आ गया है। इसी के साथ सड़कें भी धंस चुकी हैं। हालांकि विभाग की पूरी कोशिश है कि लीकेज न बने, मगर पानी का प्रेशर पुरानी लाइनें नहीं झेल पा रही हैं। करीब 15 से 20 साल पहले जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने प्लास्टिक की पाइप लाइन डाली थी। जो अब पानी के प्रेशर के लायक नहीं बची हैं। विभाग अब उच्च मानकों पर आधारित पाइप ही पेयजल लाइनों के लिए डाल रहे हैं, जिनकी लीकेज की संभावना भी बहुत कम है।
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शहर के इन हिस्सों में बनी है लीकेज की अधिक समस्या
शहर के मानान पाना, किरोड़ीमल पार्क कॉलोनी, दिनोद रोड, कृष्णा कॉलोनी, सेवा नगर, सराय चौपटा क्षेत्र, नया बाजार, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र, हालु मोहल्ला, पतराम गेट क्षेत्र, जैन चौक क्षेत्र, दादरी गेट, ढाणा रोड का इलाका शामिल है।
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शहर के अंदर पुरानी लाइनों की वजह से लीकेज की समस्या बनी है। जिन हिस्सों में पेयजल लाइनें लीक हैं, वहां पर समाधान के लिए काम चल रहा है। फिलहाल लाइनों को रिपेयर किया जा रहा है। अमृत द्वितीय चरण की अभी मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलने के बाद बड़े स्तर के कार्यों को तय मानकों के हिसाब से कराया जाएगा।
-सूरज प्रकाश जैन, एसडीओ शहरी पेयजल शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग।