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गांव गागड़वास में 268 वर्ष से निभाते आ रहे 'कार' लगाने की परंपरा

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गांव गागड़वास की स्थापना के साथ ही बनाए गए मंदिर में बाबा के चरण। संवाद - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। लोहारू क्षेत्र में करीब तीन सौ घरों की आबादी के गांव गागड़वास में 268 वर्ष (संवत 1810) से होली पर्व पर पूरे गांव की फिरनी में कार लगाने यानी पानी, तेल, दूध और मदिरा के मिश्रण को सुराग वाली मटकी में भरकर सुरक्षा घेरा बनाने की परंपरा चली आ रही है। ऐसा पूरे गांव को महामारियों से बचाव के लिए किया जा रहा है।
ऐसा नहीं हैं कि गांव में यह परंपरा रूढ़िवादी सोच की वजह से चली आ रही है, बल्कि इसी छोटे से गांव की मिट्टी में पले बढ़े कई आईएएस, आईपीएस और प्रदेश की राजनीति के दिग्गज नेताओं ने हरियाणा को नई बुलंदियां दी हैं।
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राजस्थान से आए गागड़ परिवार ने संवत 1531 में टीले पर गागड़वास गांव बसाया था। उस समय ऊंचे टीले पर गांव पर कई महामारियों के संकट भी आए। इसमें कार्तिक (कातक की) बीमारी भी अहम थी। उस दौर में दादु पंथ के बाबा बुधनाथ महाराज ग्रामीणों को ऊंचे टीले पर बसे गांव के उजड़ने के कारण से आदेश दिया था कि टीले से नीचे दक्षिण दिशा में बस जाओ। इसके बाद संवत 1810 में उन्हीं पूर्वजों के वंशज खेमकरण भगत ने टीले से नीचे गांव को फिर से बसाया था। तभी से लेकर होली पर महामारी से छुटकारा पाने और आसुरी शक्तियों से निजात दिलाने के लिए गांव के बाहर फिरनी पर पूरे गांव की कार लगाने यानी पानी, दूध, तेल और मदिरा मिलाकर गेहूं की बाकली को थैले में भरकर गांव के कुएं के पास से लेकर सुरक्षा घेरा बनाने की परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा को गांव के युवा निभाते हैं। कार लगाने के दौरान खासकर गांव के लोग भी गांव की फिरनी से बाहर नहीं जाते। न ही कोई गांव की फिरनी में अंदर सुरक्षा घेरे को तोड़ने के लिए दाखिल होता है। इसके लिए खास तौर पर युवा पहरेदारी भी करते हैं।
यह है मान्यता
गांव गागड़वास निवासी कृष्ण गागड़वास ने बताया कि ऐसी मान्यता चली आ रही है कि गांव में कार लगाने की परंपरा के बाद से न तो अकाल पड़ा है न ही आग लगने की कोई बड़ी घटना हुई है। साथ महामारी का इस गांव पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है। ऐसा नहीं है कि गांव में पढ़े-लिखे लोग नहीं हैं, मगर ये परंपरा उनकी आस्था से जुड़ी है, तभी सदियों से लेकर अब तक बदस्तूर चली आ रही है। जिसमें गांव के युवा भी उत्साह से भाग लेते हैं। होलिका दहन से पहले पूरे गांव से देशी घी एकत्रित किया जाता है। अगले ही दिन भौर में पूरे गांव को कार लगाने की परंपरा निभाई जाती है।
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ये हैं गांव में बड़े चेहरे
गांव गागड़वास से हरियाणा के पूर्व शिक्षामंत्री चौ. बहादुर सिंह थे। बहादुर सिंह के बेटे जगदीप सिंह आईएएस हैं। उनकी बेटी भी प्रदेश की होनहार खिलाड़ी हैं। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल के दामाद पूर्व विधायक चौ. सोमबीर सिंह भी इसी गांव से ताल्लुक रखते हैं। चौ. सोमबीर भी इलाके की राजनीति में सक्रिय बड़े राजनेता हैं। गागड़वास निवासी कृष्ण की बेटी अनुपम 2016 में मणिपुर कैडर से आईपीएस अधिकारी हैं। इसी गांव के आईएएस रामनारायण जो 1987 में सांसद भी बने। इसी गांव का बेटा मनोज एचसीएस से आईएएस अधिकारी बना है। इसके अलावा भी प्रदेश की राजनीति में कई दिग्गज चेहरे अपनी हिस्सेदारी निभा रहे हैं। (संवाद)
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