भिवानी। पिछले 15 से 20 दिन से लगातार ही शहर के वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। वीरवार को वातावरण में मौजूद प्रदूषण ने वीरवार को स्मॉग का रूप ले लिया। वीरवार को दिनभर एक्यूआई 400 पार ही रहा, जबकि शाम छह बजे 439 तक पहुंच गया। इस स्मॉग के कारण बुजुर्गों और दमा रोगियों को काफी परेशानी हुई। इससे सांसें अटकनी तो आंखें जलने लगी हैं। स्मॉग का असर दृश्यता पर भी पड़ा। विशेषज्ञ की मानें तो वातावरण में धूल व धुएं के कणों की मात्रा बढ़ने, हवा न चलने, तापमान में कमी व बादल छाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
शहर में सड़कों पर जहां धूल उड़ रही है तो कूड़ा-कचरा अभी भी जलाया जा रहा है। दिवाली त्योहार के दौरान मौसम में आई नमी के साथ वातावरण में आतिशबाजी के धुएं से घुला जहर अभी भी बरकरार है। वहीं शहर में कई जगह कूड़े के ढेरों में आग लगाई जा रही है, जिसके कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। एक्यूआई बढ़ने से बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों पर प्रदूषण का दुष्प्रभाव अधिक हो रहा है।
सुबह से ही जहरीली होती गई हवा
वीरवार को अल सुबह से ही शहर की हवा जहरीली होनी शुरू हो गई थी। वीरवार सुबह चार बजे एक्यूआई 354, सुबह पांच से सात बजे तक 363, सुबह आठ बजे 388, सुबह नौ बजे 396, सुबह 10 से 11 बजे तक 405, दोपहर 12 बजे 420, दोपहर एक बजे 428, दोपहर दो बजे 434, दोपहर तीन बजे 434, दोपहर चार बजे 437, दोपहर पांच बजे 437, शाम छह बजे 439 दर्ज हुआ।
इन कारणों से बनती है स्मॉग
वैसे तो वातावरण में हर समय धूल व धुएं के कण मौजूद रहते हैं, मगर कुछ गतिविधियों से वातावरण में इनकी मात्रा बढ़ जाती है। अगर वातावरण में नमी की मात्रा ज्यादा है और तापमान भी कम है तो उस स्थिति में धूल व धुएं के कण नमी के साथ मिलकर बड़े आकार के व भारी हो जाते हैं और वातावरण से बाहर नहीं जा पाते। फिर यह स्मॉग (धुएं की चादर) के रूप में नजर आते हैं।
पिछले 10 दिन का एक्यूआई
दिनांक एक्यूआई
03 नवंबर 439
02 नवंबर 232
01 नवंबर 297
31 अक्तूबर 299
30 अक्तूबर 307
29 अक्तूबर 335
28 अक्तूबर 302
27 अक्तूबर 273
26 अक्तूबर 228
25 अक्तूबर 291
एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक:
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच बेहतर, 51-100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच सामान्य, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है। वहीं हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह
इन दिनों प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और शाम के समय घरों से कम बाहर निकलें। मौसम साफ होने, हवा के चलने व बारिश होने से ही इस स्मॉग से राहत मिलेगी। हवा के चलने से धूल व धुएं के ये कण उड़ जाएंगे। वहीं बारिश होने की स्थिति में ये कण पानी की बूंदों के साथ जमीन पर आ जाएंगे।
- डॉ. यतिन गुप्ता, सीनियर फिजिशियन, नागरिक अस्पताल।