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दो बार सरपंच रहे गजानंद को पछ़ाड पनिहार के सिर सजा बहल का ताज

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बहल। पंचायती दंगल में रोचक मुकाबले वाले गांवों में शुमार बहल कस्बे में इस बार सरपंची का ताज साधूराम पनिहार के सिर पर सजा है। साधूराम पनिहार ने दो बार सरपंच रहे गजानंद अग्रवाल को पराजित किया है, जबकि मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन रहे सुशील केडिया तीसरे नंबर पर रहे हैं। साधूराम पनिहार को कुल पड़े 6530 वोटों में से 3388 वोट मिले हैं जबकि गजानंद अग्रवाल को 1863 व सुशील केडिया को 1020 वोट मिले हैं। साधूराम पनिहार ने यह मुकाबला 1525 वोटों से जीता है।
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बहल कस्बे में जब चुनाव पीक पर पहुंचा गया था उस समय किसी को भी इतने बड़े उलटफेर की उम्मीद नहीं थी। राजनीति से जुड़े लोग दो प्रत्याशियों (साधूराम, गजानंद) के बीच केवल 500 मतों के अंतर की हार-जीत मानकर चल रहे थे। जबकि कुछ लोगों का यह मानना था कि सुशील केडिया छुपे रुस्तम साबित हो सकते हैं और उनको भी किसी सूरत में कम नहीं आंक रहे थे। लेकिन आखिर ऐसा चुनावी उलटफेर हुआ कि सभी पूर्वानुमान ध्वस्त हो गए। किसी को यह अनुमान नहीं था कि साधूराम पनिहार को इतनी बड़ी जीत मिलेगी और वह किसी को पास भी नहीं फटकने देंगे। जहां साधूराम को कुल पड़े वोटों में से पचास फीसदी वोट अकेले को मिले हैं वहीं अगर दूसरे और तीसरे प्रत्याशी के मतों का जोड़ किया जाए तो भी 505 वोट ज्यादा मिले हैं।
हर बूथ पर लीड बनाते रहे साधूराम पनिहार
साधूराम पनिहार की जीत में सबसे बड़ी खासियत उनके चुनावी मैनेजमेंट की रही। शुरू से लेकर आखिर तक उनकी टीम एक सुनियोजित नेटवर्क की तरह काम करती रही। साधूराम को अपने प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशियों से हर बूथ पर लीड मिली। कुल दस बूथों में एक भी बूथ ऐसा नहीं रहा जहां उनको दूसरों से कम वोट मिले हो। साधूराम को दस में से तीन बूथों में 400 से ऊपर, तीन बूथों में 300 से ऊपर, 3 बूथों में 250 से ऊपर वोट मिले। एक बूथ में उनको 141 वोट मिले लेकिन उसमें भी सबसे ज्यादा मत इन्हीं के रहे। वहीं इनके निकटतम प्रत्याशी गजानंद अग्रवाल को दो बूथों में 250 से ऊपर, दो बूथों में 200 से ऊपर, दो बूथों में 150 से ऊपर व तीन बूथों में 100 से ऊपर वोट मिले। एक बूथ में 88 वोट मिले।
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सात में तीन प्रत्याशी नहीं बन सके शतकवीर
चुनावी मुकाबले में रहे साधूराम पनिहार, गजानंद अग्रवाल, सुशील केडिया के अलावा चार अन्य प्रत्याशी भी मैदान में थे। इन प्रत्याशियों में एडवोकेट कुलदीप जांगड़ा को छोड़ दिया जाए तो जितेंद्र कुमार (22), कृष्ण कुमार (66) व हिम्मत जावला (25) शतक भी नहीं लगा सके। एडवोकेट कुलदीप ही केवल 135 वोटों तक पहुंच सके। इस तरह से चुनाव केवल तीन प्रत्याशियों के बीच ही रहा। इसके अलावा 11 मतदाता ऐसे भी रहे जिनको इनमें से कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आया और उन्होंने नोटा का बटन दबाया।
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