भवानी। किसी सड़क हादसे या फिर प्राकृतिक आपदा में लोगों की जान बचाने के लिए फ्रंट लाइन में बने रहने वाले एंबुलेंस चालकों की खुद जान आफत में आ गई है। नागरिक अस्पताल के रेफरल ट्रांसपोर्ट सिस्टम यानी एंबुलेंस सेवा डॉयल 102 पर चालकों और ईएमटी के लिए सिर्फ छोटा सा कमरा रेस्ट रूम है। जिसके अंदर ठीक से बैठने के लिए भी जगह तक नहीं हैं। कोरोना की तीसरी लहर में एंबुलेंस बेड़े को और भी अलर्ट पर किया गया है। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने रोडवेज से भी 31 चालक उधार लेकर यहां तैनात किए हैं, इन रोडवेज कर्मचारियों को भी इसी रेस्ट रूम में बैठना पड़ता है। ये कमरा इतना छोटा है कि यहां मुश्किल से चार से पांच आदमी ही बैठ सकते हैं, अगर कोई लेट कर दो मिनट आराम करना चाहे तो उसकी गुंजाइश नहीं है। संवाद
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छत टपक रही, दिवारों का प्लास्टर रिस रहा -
रेस्ट रूम में बैठने के लिए एक तख्त है, उसके ऊपर छत लगातार टपक रही है। दीवारों में भी लीकेज के कारण सीलन और मोटी दरारें आ चुकी हैं। जबकि शौचालय सिर्फ नाम का ही शौचालय है, जो इस्तेमाल लायक भी नहीं है। जहां वे बैठते हैं, वहां न जाने कब छत का मलबा उनके ऊपर गिर जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं। लीकेज इतनी ज्यादा है कि दीवारों में भी प्लास्टर कम पानी अधिक रिस रहा है, जिससे खतरा और भी बढ़ गया है।
दबी जुबान से एंबुलेंस चालकों ने बताया कि उन्होंने भी रेस्ट रूम की बदहाली को लेकर काफी बार स्वास्थ्य अधिकारियों को अवगत कराया, मगर अन्य कोई जगह नहीं मिलने का बहाना बनाकर उनकी समस्या को अनदेखा कर दिया। अब रोडवेज के चालक इस बदहाल जगह पर बैठने से भी कतरा रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के एंबुलेंस चालक और ईएमटी तो पहले से ही यहां बैठने पर घबरा रहे हैं। अस्पताल में बायोवेस्ट भी उन्हीं के रूम के पास रखा जा रहा है। ऐेसे में अगर एंबुलेंस चालकों की सेहत बिगड़ती है तो फिर स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी भी लड़खड़ा जाएगी।
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एक कमरा और 90 एंबुलेंस चालक -
बता दें कि स्वास्थ्य विभाग के बेड़े में जिला मुख्यालय पर ही 13 जीवन रक्षक एंबुलेंस और 9 पेसेंट ट्रांसफर एंबुलेंस हैं। चार बड़ी मोबाइल एंबुलेंस बसें भी हैं। इन पर करीब 80 एंबुलेंस चालक और करीब 40 ईएमटी तैनात हैं। तीन शिफ्टों में ये कर्मचारी लगातार ड्यूटी दे रहे हैं। मगर ड्यूटी के दौरान इन्हें उस कमरे के अंदर रखा जाता है, जो कहने को तो रेस्ट रूम हैं, मगर यहां रेस्ट यानी आराम करना मुमकिन नहीं है।
एंबुलेंस चालकों और ईएमटी रेस्ट रूम का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से बातचीत कर रेस्ट रूम की हालत सुधारी जाएगी और यहां पर चालकों के बैठने और रेस्ट करने की भी व्यवस्था जल्द कराई जाएगी।
- डॉ. मनीष श्योराण, नोडल अधिकारी, रेफरल ट्रांसपोर्ट सिस्टम भिवानी।
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