भिवानी। दो दशक बाद कांग्रेस की राजनीति को अलविदा कहने वाली किरण चौधरी की आवाज अब राज्यसभा में भाजपा के पक्ष में गूंजेगी। वहीं, किरण के राज्यसभा में जाने के बाद अब बेटी के हाथों में विधानसभा चुनाव की बागडोर आ गई है।
भाजपा किरण को अपने खेमे में शामिल करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल के गढ़ में अपनी पैठ जमा रही है। पूर्व कृषि मंत्री चौ. सुरेंद्र सिंह के विमान हादसे में मौत के बाद किरण चौधरी ने 2005 में तोशाम उप चुनाव से हरियाणा की सक्रिय राजनीति में अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। करीब 19 साल तक वे लगातार तोशाम क्षेत्र में विधायक रहीं। अब किरण के राज्यसभा में जाने के बाद उनकी बेटी पूर्व सांसद श्रुति चौधरी तोशाम से विधानसभा चुनाव की भावी उम्मीदवारों की दौड़ में हैं।
किरण चौधरी ने हरियाणा की सक्रिय राजनीति में कूदने से पहले दिल्ली कैंट से 1993 में पहला चुनाव लड़ा था, जिसमें वह हार गई थी। इसके बाद 1998 में चुनाव जीतकर दिल्ली विधानसभा में उपाध्यक्ष बनीं। पति सुरेंद्र सिंह के विमान हादसे में निधन के बाद किरण चौधरी ने हरियाणा का रुख किया। साल 2005 के उपचुनाव में तोशाम से विधायक बनी।
इसके बाद 2009, 2014 और 2019 के विधानसभा चुनावों में भी लगातार जीत दर्ज कर तोशाम का प्रतिनिधित्व किया। कांग्रेस सरकार में किरण जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री भी रही। बंसीलाल परिवार की राजनीतिक विरासत को संभाले किरण चौधरी ने बेटी श्रुति चौधरी को भी सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनाया। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से श्रुति चौधरी भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र की सांसद बनीं। मां-बेटी की जोड़ी ने इलाके में चौ. बंसीलाल की राजनीतिक को सक्रियता के साथ आगे बढ़ाया।
अब भाजपा किरण चौधरी के साथ राजनीतिक साझेदारी में है। वहीं प्रदेश में खासकर भिवानी-महेंद्रगढ़ क्षेत्र में भाजपा किरण के साथ ही विधानसभा चुनावों में आगे बढ़ने की राह पर चल रही है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी तोशाम रैली में पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के बारे में हुड्डा पर कटाक्ष करते हुए कह चुके हैं कि हुड्डा नहीं सीख पाए लेकिन हम जरूर सीखेंगे।
तोशाम में अब तक नहीं खुला है भाजपा की जीत का खाता
पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल के गढ़ तोशाम में 1957 से लेकर अब तक भाजपा की जीत का खाता नहीं खुला है। यहां पर तीन बार निर्दलीय तो 10 बार कांग्रेस के खाते में जीत दर्ज की गई है। एक बार लोकदल और दो बार हरियाणा विकास पार्टी से यहां विधायक बने हैं। लगातार 19 साल से प्रदेश में किसी भी दल का वर्चस्व रहा हो लेकिन तोशाम पूर्व मुख्यमंत्री का अभेद्य गढ़ रहा है। ऐसे में अब भाजपा तोशाम में कमल खिलाने को लेकर आशान्वित है।