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गणेश पूजन व कलश स्थापन के साथ जहगिरी आश्रम में शुरू हुआ नवदिवसीय अखंड शतचंडी महायज्ञ

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भिवानी। हालुवास गेट स्थित बाबा जहरगिरी आश्रम में पहली बार शारदीय नवरात्र में सोमवार से नौ दिवसीय अखंड शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ गणेश पूजन व कलश स्थापन के साथ शुरू हुआ। इस मौके पर आश्रम के पीठाधीश्वर मंहत डॉ. अशोक गिरी महराज ने बताया कि शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में मां भगवती का यह विशेष यज्ञ भिवानी ही नहीं अपितु हरियाणा में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। जिसका प्रारंभ अरणी मथंन द्वारा अग्नि प्राक्टय कर अखंड यज्ञ के साथ किया गया।
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उन्होंने बताया कि यह यज्ञ 24 घंटे व आठों पहर जारी रहेगा। महंत ने बताया कि अखंड हवन यज्ञ का विशेष महत्व है। अखंड शतचंडी महायज्ञ का महत्व बताते हुए महंत ने बताया कि मां ने महाकाली के रूप में राक्षसों का संहार किया, जिसका वर्णन मार्कंडेय पुराण में श्रीदुर्गा सप्तशती ग्रंथ में वर्णित है। श्रीदुर्गा सप्तशती के पाठ को 108 बार करने को शतचंडीपाठ महायज्ञ कहा जाता है। पाठ को एक लाख बार करने पर लक्ष्यचंडी महायज्ञ कहा जाता है, लेकिन इस आयोजन में अखंड यानि 9 दिनों तक 24 घंटे यज्ञ चलेगा, जिसकी कोई संख्या नहीं होगी। इस पाठ या हवन से सभी प्रकार की परेशानियों से मुक्ति मिलती है और मां दुर्गा की विशेष कृपा सदैव भक्तों पर बनी रहती है। डॉ. अशोक गिरी महराज ने नवरात्रों का महत्व बताते हुए कहा कि नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों मतलब विशेष रात्रियों का बोध होता है। रात्रि शब्द सिद्धि का प्रतीक है और इस समय शक्ति के नवरूपों की उपासना की जाती है। इस दौरान बाबा कैलाश गिरी, दीपक पाठक, विशाल पाठक, आनंद पांडे, सुनील बोंदिया, रमन गुप्ता, बसंत शास्त्री, राजेंद्र शर्मा, कार्तिक शर्मा, रितेश, शुभम सैनी मौजूद रहे। संवाद
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