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कोरोना का डर, आसान नहीं बच्चों का घर से स्कूल तक का सफर

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कक्षा में उपस्थित नन्हें बच्चे। संवाद - फोटो : Bhiwani
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नवनीत शर्मा
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भिवानी। कोरोना संक्रमण की आशंकित तीसरी लहर और ओमिक्रॉन के खतरे को लेकर लोगों के मन में भय है। घर से स्कूल में जाने वाले बच्चों की लापरवाही उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। स्कूल में अनजाने में किया चीजों का आदान-प्रदान बच्चों को संक्रमित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पांच साल तक के बच्चों का मास्क न लगाएं।
स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार पांच साल से छोटे बच्चों को मास्क न लगाए, क्योंकि इससे उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, जोकि स्वास्थ्य के लिए खतरा है। इन दिनों मौसम में हुए बदलाव की वजह से बच्चे खांसी, जुकाम, बुखार जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे है। ऐेसे में अभिभावक उन्हें कोरोना से तुलना न करते हुए समय पर स्वास्थ्य की जांच करवाएं।
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नवजात शिशु का रखे विशेष ख्याल
नवजात शिशु की मां प्रोटीन का ज्यादा सेवन करें, ताकि दूध पीने वाले बच्चे की इम्यूनिटी बरकरार रहे। नवजात मास्क नहीं पहन सकता, इसलिए मां ही मास्क का प्रयोग करें। अपने हाथों को अच्छे से धोएं और स्तनपान करवाते समय साफ-सफाई रखें। बच्चे को जिस बिस्तर पर लिटा रहे हैं, वह चद्दर धुली हुई हो। एक ही व्यक्ति बच्चे का ख्याल रखें, वह मां हो तो अधिक बेहतर है। क्वारंटीन के दौरान मानसिक तनाव न लें।
ये लक्षण होने पर चिकित्सक से करवाएं जांच
बच्चे को अगर कफ, नजला, खांसी, जुकाम, बुखार, उल्टी, दस्त और आंखों में सूजन व कमजोरी है तो ऐसे में सतर्क रहे। ऐसे लक्षण होने पर अभिभावक सामान्यत: इसे फ्लू या वायरल समझ लेते हैं तो कोरोना के इस दौर में ऐसी भूल न करें और तुरंत प्रभाव से चिकित्सक से जांच करवाएं।
बच्चों का कोरोना से ऐसे करें बचाव
- बच्चों को जब भी बाहर जाना हो तो उन्हें सर्जिकल मास्क जरूर पहनाएं। ध्यान रहे की पांच साल से बड़े बच्चों को ही मास्क पहनाएं।
- बच्चों को पार्क, बाजार या दूसरी भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से रोकें।
- घर के अंदर भी उन्हें समय-समय पर हाथ धोते रहने की सलाह दें। उन्हें कोरोना नए वैरिएंट के लक्षणों की जानकारी दें, ताकि वो खुद को सुरक्षित रहने का प्रयास करें।
- बच्चे को जुकाम खांसी है तो उसे घर के दूसरे लोगों से अलग कमरे में आइसोलेट जरूर करें।
- अगर बच्चों में कोरोना के हल्के लक्षण भी दिख रहे हैं तो बिना देर किए कोरोना टेस्ट करवाएं।
कोरोना संक्रमित बच्चे को ऐसे करें आइसोलेट
- अगर बच्चे के अलावा भी घर पर कोई अन्य सदस्य कोरोना संक्रमित है तो वे एक ही कमरे में आइसोलेट हो सकते हैं।
- बच्चा अगर अकेला रहने से डरता है तो कोविड-19 सुरक्षा नियमों को ध्यान में रख उसके साथ परिवार का एक सदस्य रह सकता है।
- बच्चे के खिलौने अच्छे से धोएं और सैनिटाइज जरूर करें।
- फर्श और कमरे में सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- अगर बच्चा छोटा है और वह अकेले नहीं सो पाता तो पास में सोने वाला अभिभावक मास्क जरूर लगाए।
बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह
बदलते मौसम में बच्चों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कोरोना के अलावा वायरल, फ्लू, निमोनिया का खतरा भी बच्चों पर मंडराता रहता है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चे को घर से बाहर लेकर जाने से बचें और उसे घर पर ही सुरक्षित रखें। सर्दी के मौसम में गर्म कपड़े पहनाएं और पांच साल से बड़े बच्चों को मास्क लगाएं। साथ ही बच्चे में अगर कोरोना के लक्षण हैं तो तुरंत चिकित्सक से जांच करवाएं।
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- डॉ. रीटा सिसोदिया, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।
बच्चों के लिए अलग से व्यवस्था
कोरोना संक्रमण की आशंकित तीसरी लहर और ओमिक्रॉन को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। नागरिक अस्पताल में कोरोना संक्रमित बच्चों को दाखिल करने के लिए अलग से नीकू आईसीयू तैयार किया गया है। इसके साथ ही चिकित्सक और स्टाफ का प्रशिक्षण भी करवाया जा चुका है। इस दिनों बच्चे मौसमी बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं तो ऐसे में अभिभावक विशेष ध्यान रखें। समय पर बच्चे के स्वास्थ्य की जांच करवाएं।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन।
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