भिवानी। हरियाणा पुलिस पुरुष सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड को खंगालने के लिए भिवानी सीआईए द्वितीय की टीम हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पंचकूला मुख्यालय पर पहुंची है। वहां भर्ती घोटाले से रिकॉर्ड को खंगाला जाएगा। रिकॉर्ड की की जांच और सीसीटीवी फुटेज ही सिपाही भर्ती घोटाले के कई राज भी खोलेंगे। वहीं कई अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं।
हालांकि पुलिस रिकॉर्ड की जांच से पहले कुछ भी स्पष्ट तौर पर खुलासा नहीं कर रही है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि भर्ती घोटाले के आरोपी असली परीक्षार्थियों से सौदेबाजी कर उनकी जगह फर्जी परीक्षार्थियों को किसकी मदद से परीक्षा केंद्रों के अंदर प्रवेश दिलाने में कामयाब हो जाते थे। परीक्षा केंद्र के अंदर फर्जी परीक्षार्थी के लिए पेपर देना आसान नहीं है। इसलिए बिना किसी बड़े अधिकारी की मिलीभगत के यह संभव नहीं है। पुलिस सिपाही भर्ती घोटाले में दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल राममेहर और डी ग्रुप के दो कर्मचारी कलम सिंह व विवेक मुख्य सरगना हैं। ये तीनों ही सौदेबाजी करने, दूसरों की जगह परीक्षा देने और असल परीक्षार्थियों के जाली दस्तावेजों को तैयार कराते थे।
भिवानी सदर थाना पुलिस ने 21 जनवरी को हरियाणा पुलिस सिपाही भर्ती में फर्जी परीक्षार्थियों को असल परीक्षार्थी की जगह बैठाकर परीक्षा पास कराने और उनके जाली दस्तावेज तैयार कराने वाले गिरोह के सक्रिय होने पर एफआईआर दर्ज की थी। इसकी जांच भिवानी सीआईए द्वितीय के इंचार्ज नरेंद्र कुमार को सौंपी गई। सीआईए द्वितीय ने इस फर्जीवाड़े में तीनों मुख्य आरोपियों के साथ फर्जी और असल परीक्षार्थियों को भी गिरफ्तार किया। इसमें अब तक पुलिस 19 लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी है, जबकि पुलिस को खुद यह नहीं मालूम कि इस गड़बड़झाले में कितने और आरोपियों को काबू किया जाना है, क्योंकि इस फर्जीवाड़े की कड़ी एक-दूसरे से जुड़ती ही जा रही है। इन्हीं कड़ियों के सहारे सीआईए पुलिस भी आगे बढ़ एक के बाद एक आरोपी को दबोचने में कामयाब हो रही है।
तीन सरकारी नौकरों ने ही लिख डाली हरियाणा पुलिस सिपाही भर्ती फर्जीवाड़े की पटकथा
हरियाणा पुलिस सिपाही भर्ती फर्जीवाड़े के तीन सरकारी नौकरों ने फिल्मी अंदाज में फर्जीवाड़े की पूरी पटकथा लिख डाली। मुख्य सूत्रधार दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल जींद के डालमवाला निवासी राममेहर खुद परीक्षा केंद्र में बैठकर दो से तीन परीक्षार्थियों के पेपर दे चुका था। राममेहर एमए तक पढ़ा है। उसके साथ जींद के खरंटी निवासी और महम के सरकारी स्कूल के चपरासी विवेक एवं सिंचाई विभाग पानीपत में बेलदार कलम सिंह भी पूरे प्लान का ब्ल्यूप्रिंट तैयार कर इस फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड हैं। ये तीनों सरकारी नौकरी करने के बावजूद दूसरों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 15 से 20 लाख रुपये ऐंठते थे। हालांकि कई परीक्षार्थी तो ऐसे भी मिले हैं, जिन्हें कम पैसे में भी पेपर पास कराने का झांसा दे रखा था। इनसे सात से दस लाख रुपये में सौदेबाजी भी तय हुई थी।
फर्जी परीक्षार्थी लेता था चार से पांच लाख
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में कैथल के राकेश उर्फ काला ने बताया कि असल परीक्षार्थी की जगह खुद उसने पेपर दिया था। असल परीक्षार्थी की परीक्षा देने के बदले उसे मुख्य आरोपियों से चार से पांच लाख रुपये मिलते थे। इसी तरह अन्य फर्जी परीक्षार्थियों को भी चार से पांच लाख रुपये के हिसाब से ही पैसा मिलता था। इसलिए ये दूसरे की जगह परीक्षा देने के लिए तैयार हो जाते थे। (संवाद)
टीम पहुंची है मुख्यालय
हरियाणा पुलिस सिपाही भर्ती फर्जीवाड़े को लेकर हमारी टीम हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) पंचकूला मुख्यालय पहुंची है। यहां एचएसएससी अधिकारियों से परीक्षा से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा है, जिसकी जांच की जाएगी और सीसीटीवी फुटेज से भी पता लगाया जाएगा कि आखिर इसने बड़े स्तर पर फर्जी परीक्षार्थियों से परीक्षा दिला दी गई और किसी को कोई भनक तक नहीं लगी। रिकॉर्ड जांच में कई अहम बातें पुलिस को पता लगेंगी।
-नरेंद्र कुमार, इंचार्ज सीआईए द्वितीय भिवानी।