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Bhiwani News: अलखपुरा की बेटियों ने किक मार बदली किस्मत

Mon, 01 Apr 2024 05:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। मुक्केबाजी और कबड्डी के लिए चर्चित भिवानी जिले के अलखपुरा गांव की मिट्टी फुटबालर पैदा कर रही है। किसान और मजदूरों के इस गांव में बेटियों को फुटबाल खेलने की लगन ऐसी लगी कि वे इसकी दीवानी हो गईं। अब हर घर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। सही मार्गदर्शन, लगन और मेहनत के दम पर ये देश-दुनिया में जीत हासिल कर परिवार, समाज और राष्ट्र का गौरव बढ़ा रही हैं तो किक के दम पर अपनी किस्मत भी बदल रही हैं। गांव की 40 बेटियां फुटबाल के दम पर सरकारी नौकरी हासिल कर चुकी हैं। फिलहाल गांव की तीन खेल अकादमियों के तीन ही फुटबाल खेल मैदान में करीब 200 महिला खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं के लिए खुद को तैयार कर रही हैं।
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कोच बनीता ने बताया कि खेल स्टेडियम की शुरुआत 2008 में हुई थी। शुरुआत में बहुत सारी परेशानियों को सामना करना पड़ा था। शुरू में ग्रामीण परिवेश की लड़कियों की भागीदारी कम थी लेकिन अब समय बदल गया है। माता-पिता अपने बच्चों को हर क्षेत्र में भेजने लगे हैं। खेलों में लड़कियों की भागीदारी बढ़ी है। स्टेडियम में अब तक 400 खिलाड़ियों ने प्रशिक्षण लिया है, जिनमें से करीब 200 बेटियां हैं। इस गांव के मैदान में खेलकर नामचीन फुटबॉलर बनीं पांच बेटियां फिलहाल कोच बन चुकी हैं।
बनीता ने बताया कि इस गांव श्वेता रानी अंडर-16 महिला सैफ चैंपियनशिप नेपाल (काठमांडू) में टीम की कप्तान रही हैं। टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। बांग्लादेश की ढाका में पूजा ने अंडर 19 सैफ गेम व अंडर 17 एशियन कप में हिस्सा लिया। टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और पूजा सर्वोच्च स्कोर करने वाली खिलाड़ी रही। शैलजा, वर्षिका ने ओडिशा में हुए विश्व कप में भाग लिया और उम्दा प्रदर्शन किया। संवाद
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गांव में ये हैं सुविधाएं
गांव में फुटबाल क्लब अलखपुरा के नाम से सरकारी खेल अकादमी है। लड़कियों के लिए तीन खेल मैदान हैं, जहां रोजाना ही करीब 200 खिलाड़ी अभ्यास करती हैं। अकादमी में दाखिला नि:शुल्क हैं, क्योंकि बेटियों के लिए सरकार ने फुटपाल की खेल अकादमी खोल यहां प्रशिक्षित कोच दिए हैं। वहीं खिलाड़ियों के लिए खेल अकादमी में 25 सीट निर्धारित है, जिन्हें हर माह सरकार की तरफ से 1500 से 2000 रुपये का खुराक भत्ता मिलता है।



अलखपुरा की महिला खिलाड़ियों की खेल 2023 की उपलब्धियां

- 12 जनवरी को अंडर-17 टीम ने दिल्ली में खेलो इंडिया गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

- 16 जनवरी को ढाणी फोगाट चरखी दादरी में आयोजित प्रतियोगिता में जीत हासिल की।

- 17 जनवरी को एलएनआईपीई ग्वालियर में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में सीबीएलयू की टीम में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

- 27 जनवरी को पटौदी गुरुग्राम में हुई प्रतियोगिता में जीत हासिल की।

- 3 फरवरी को वर्षिका और शैलजा ने अंडर-20 सैफ कप में प्रतिनिधित्व किया।

- 6 फरवरी को खुशी, मुस्कान, पूजा और श्वेता ने जॉर्डन के लिए अंडर-17 भारतीय टीम में अपना स्थान हासिल किया।

- 9 फरवरी को खेलो इंडिया यूथ गेम्स के लिए रिंकू, रितु और तमन्ना का चयन हुआ।

- 18 मार्च को अंडर-17 सैफ खेलों के लिए पूजा का चयन।

- 19 अप्रैल को पूजा और स्वेता ने एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया।

- 23 अप्रैल से 18 मई को हीरो इंडियन महिला लीग में अलखपुरा की महिला खिलाड़ियों की भागीदारी रही।

- 31 मई को खेलो इंडियन यूनिवर्सिटी गेम्स में सीबीएलयू टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया।

- 10 जून को 66वें स्कूल नेशनल गेम्स में सात लड़कियां विजेता रहीं, जिसमें नैन्सी ने शीर्ष स्कोर का खिताब जीता।

- 28 जून को सीनियर महिला राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों ने रजत पदक की जीता।

- 28 जून को लड़कियों ने सीनियर नेशनल में भाग लिया।

- 10 जुलाई को खुशी, श्वेता, पूजा, पारुल और संध्या का भारत अंडर-17 कैंप में चयन।

- 6 अगस्त को जीएसएसएस अलखपुरा प्री सुब्रतो टूर्नामेंट में चैंपियन बना।

- 27 अगस्त को 19 वें एशियाई खेलों के लिए संजू यादव और रितु रानी का चयन।

- 1 सितंबर को हीरो अंडर-14 गर्ल्स नेशनल चैंपियनशिप के लिए दस लड़कियों का चयन किया गया, जिन्होंने शीर्ष आठ में स्थान हासिल किया।

- 26 सितंबर को हीरो अंडर-14 गर्ल्स नेशनल चैंपियनशिप के लिए दस लड़कियों का चयन किया गया, जिन्होंने शीर्ष आठ में स्थान हासिल किया।

- 26 सितंबर को सुब्रतो इंटरनेशनल फुटबाल टूर्नामेंट में अलखपुरा की टीम ने रजत पदक जीता।

- 4 अक्टूबर को चार लड़कियों का एसएसबी में चयन हुआ।

- स्कूल, राज्य स्तर पर अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 श्रेणियों में स्वर्ण पदक जीता।

- 5 नवंबर को गोवा में हुए 37 वें राष्ट्रीय खेलों में हरियाणा की टीम 12 खिलाड़ी अलखपुरा के थे, जिन्होंने ने टीम में रहते कांस्य पदक जीता।

- गोवा में हुए 37वें राष्ट्रीय खेलों में अलखपुरा के 15 खिलाड़ियों ने भाग लिया (14 चंडीगढ़ से और 1 पश्चिम बंगाल से खेलीं)

- असम राइफल्स में संतोष का चयन हुआ है।

- 30 नवंबर को खेल महाकुंभ हरियाणा में टीम अलखपुरा विजयी रही।



- 8 दिसंबर को सीबीएलयू टीम की उपलब्धियों को जोड़ते हुए नॉर्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी में सिल्वर मेडल हासिल किया।



- 24 दिसंबर को हरियाणा महिला लीग में उपविजेता, वर्षा रानी ने 33 गोल के साथ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी और शीर्ष स्कोरर का खिताब अर्जित किया था।



- 29 दिसंबर को अंडर-17 स्कूल गेम्स टीम हरियाणा के लिए पांच लड़कियों का चयन किया हुआ था।


अलखपुरा खेल स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए सारी सुविधाएं हैं। यहां की खिलाड़ी राष्ट्रीय, अंतर राष्ट्रीय खेलों में पदक प्राप्त कर चुकी है। यहां की खिलाड़ी भारतीय टीम में अलग कैटेगरी में टीम को हिस्सा रह चुकी है। कई महिला खिलाड़ी अगल-अगल क्षेत्र में नौकरी भी कर रही है।

- सोनिया, सीनियर कोच अलखपुरा स्टेडियम, बवानीखेड़ा


स्टेडियम में सरकार की ओर से स्टेडियम में सारी सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। यहां की महिला खिलाड़ियों को बहु प्रशिक्षित कोचों की देखरेख में अभ्यास करवाया जाता है। यहां पर मैं 2014 से सरकारी नर्सरी कोच के पद पर तैनात हूं। अलखपुरा में तीन सरकारी फुटबाल की खेल नर्सरी चल रही है।

-बनीता नर्सरी कोच, अलखपुरा स्टेडियम, बवानीखेड़ा
बेटियों के संघर्ष से सफलता तक की कहानी
बपचन में पिता को खोया, खेल स्कॅालरशिप से ही बढ़ाए कामयाबी के कदम
गांव अलखपुरा की बेटी पूजा का जीवन संघर्ष भरा रहा है। पूजा के पिता की बपचन में ही मौत हो गई थी। उसके परिवार में सिर्फ एक एकड़ भूमि है। पूजा अपनी खेल स्कॉलरशिप के जरिए ही अपने कामयाबी की तरफ कदम बढ़ाती हुई मुकाम को छूने में सफल रही। पूजा ने सैफ चैंपियनशिप के अंडर 19 में काठमांडू में हुई प्रतियोगिता में पूरे र्टूर्नामेंट में बेस्ट स्कोरर का खिताब जीता। इसके अलावा उसने नेशनल में भी ब्रांज मेडल जीता। उसे अब तक दो बार 50-50 हजार की स्कॉलरशिप मिल चुकी है जबकि अब उसे तीन लाख रुपये स्कॉलरशिप मिलेगी।
सात भाई-बहनों में छोटी नीमल ने असम रायफल में पाई नौकरी तो बनाया मकान
अलखपुरा की नीलम फुटबाल की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है। उसने सुब्रतो कप में अपने आयु वर्ग की भारतीय टीम में कप्तान होने का भी गौरव मिला है। पांच बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटी नीलम के खुद का घर नहीं था। मात्र एक छोटे से कमरे में पूरा परिवार सिमटकर गुजर बसर करता था। उसने खेल में उपलब्धियां पाई तो उसे खेल कोटे से असम रायफल में भारतीय सेना में जाने का मौका मिला। इसके बाद अब उसने गांव में अपना पक्का घर बनाकर परिवार का सपना पूरा किया है।
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