मुलाना/अंबाला। क्या करें, कहां जाएं कुछ पता नहीं चल रहा। यूनिवर्सिटी वाले कहते थे कि कुछ नहीं होगा, लेकिन अब तो हालात बिगड़ रहे है। बमबारी का आवाजें घबराहट पैदा कर रही हैं। अब यूनिवर्सिटी वाले कहते हैं कि जब भी सायरन बजे तो बंकर में चले जाना। ये बात रूस यूक्रेन युद्ध में फंसे मुलाना के रहने वाले अक्षत ने कही।
उसने बताया कि वह यूक्रेन में कीव से 700 किलोमीटर दूर दनीपरो शहर में एमबीबीएस के चतुर्थ वर्ष का छात्र है। रूस और यूक्रेन के तनाव के चलते उसने पहले यूक्रेन से निकलने की सोची थी, लेकिन यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें विश्वास दिलाया गया कि युद्ध नहीं होगा। इस वजह से यूनिवर्सिटी का कोई भी छात्र यहां से नहीं गया, लेकिन अब युद्ध से हालात खराब हो गए हैं और करीब 500 भारतीय छात्र इस दनिपरो शहर की मेडिकल यूनिवर्सिटी में फंसे हुए हैं।
अक्षत ने बताया कि फिलहाल उन्हें खाना सही मिल रहा है, लेकिन केवल 5-6 दिन का खाना ही बचा है। सरकार ने कहा है कि रोमानिया के बॉर्डर से निकाला जाएगा मगर रोमानिया का बॉर्डर तो हमसे एक हजार किलोमीटर की दूरी पर है। वहां पहुंचना भी जोखिम भरा है।
वहीं एक अन्य छात्र अभिनव शर्मा ने बताया कि वो दनिपरो शहर से अपने दोस्तों के साथ ट्रेन में निकल चुके हैं। ट्रेन में बहुत भारतीय छात्र हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल हम सब सुरक्षित हैं और बॉर्डर तक जाने का प्रयास कर रहे हैं। अभिनव एमबीबीएस के चतुर्थ वर्ष में है।
दूसरी ओर, खारकीव में विद्यार्थी रवींद्र सैनी ने बताया कि स्थिति बहुत नाजुक है। बमबारी की आवाजें हर मिनट सुनाई दे रही हैं। हम अपने हॉस्टल के बंकर में छिपे हुए हैं। साथ में करीब 200 भारतीय छात्र हैं। बॉर्डर हमसे सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में वहां तक जाना मुश्किल है। यूनिवर्सिटी वाले फिलहाल खाना तो दे रहे हैं, लेकिन कब तक पता नहीं।
रविंद्र सैनी- फोटो : Ambala