भाई दूज का पर्व आज यानी शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक कर उसकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। रक्षा बंधन की तरह यह त्योहार भी भाई-बहन के प्रति एक दूसरे के स्नेह को अभिव्यक्त करता है। भाईदूज को भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया आदि नामों से भी जाना जाता है। भाई दूज पर अनुराधा नक्षत्र और शोभन योग होगा। ज्योतिष गिरीश आहूजा ने बताया द्वितीया तिथि 5 नवंबर की रात्रि 11 बजकर 15 मिनट से लगकर 6 नवंबर शाम 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। तिलक करने का शुभ मुहूर्त सुबह 8.02 बजे से सुबह 9.25 बजे तक और सुबह 11.44 बजे से शाम 4.10 बजे तक रहेगा।
भाई दूज का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार यम देव अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर गए। भाई को अपने घर आया देख बहन ने आरती कर भाई का स्वागत किया। यम देव के माथे पर तिलक लगाकर बहन ने उन्हें मिठाई खिलाई और फिर भोजन कराया। यम बहन के इस स्वागत सत्कार से काफी खुश हुए और उपहार स्वरूप उन्होंने सभी भाई-बहनों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि इस दिन जो भी भाई अपनी बहन से मिलने जाएगा, बहनें उनका आरती और तिलक कर स्वागत करेंगी, इससे भाइयों का कल्याण होगा। इस कारण भाई दूज के दिन भाई-बहन के घर जाकर उनसे तिलक करवाकर, बहन के हाथ का बना भोजन करते हैं, ताकि भाई-बहन को जीवन भर यम का आशीर्वाद मिलता रहे।
ऐसे करें तिलक
भाई दूज के दिन इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि जब बहनें अपने भाई को तिलक लगाएं तो भाई का चेहरा पश्चिम दिशा में और बहन का चेहरा पूर्व दिशा में होना चाहिए। भाई के सिर के ऊपर से 3 या 7 बार पीली सरसों वार कर बाहर नाली या जलती अग्नि में डाल दें। पहले भाई के माथे पर तिलक लगाना चाहिए। इसके बाद हाथ में कलावा बांधकर दीपक जलाकर भाई की आरती उतारें और उसकी लंबी आयु की कामना करें। भाई दूज के दिन मांस और मदिरा का सेवन न करें। इस दिन भाई-बहन को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।