शहर के एक नामी स्कूल व अभिभावकों के बीच चला आ रहा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बार अभिभावकों ने स्कूल की ओर से सिर्फ वार्षिक शुल्क जमा करवाने के लिए बनाए जा रहे दबाव को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर दो घंटे तक धरना दिया। अभिभावकों ने स्कूूल पर नियमों की अनदेखी करने के आरोप भी लगाए हैं।
ज्ञापन देने पहुंचे अभिभावकों को कहना है कि स्कूल प्रबंधन कुछ दिनों के लिए स्कूल खोल कर अभिभावकों पर वार्षिक शुल्क देने का दबाव बना रहा है। बच्चों की ऑनलाइन क्लास भी स्कूल की ओर से बंद कर दी गई है। अभिभावकों ने कहा है कि हम निरंतर बच्चों की स्कूल फीस जमा करवा रहे हैं, लेकिन कोरोना के समय में स्कूल हमसे वार्षिक शुल्क जमा करवाने को लेकर दबाव बना रहा है। इस दौरान डिप्टी डीईओ सुधीर कालड़ा ने अभिभावकों से ज्ञापन लेकर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
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मेरे बच्चों को वार्षिक शुल्क जमा करवाने के लिए बोला जा रहा है। जबकि ऑनलाइन कक्षाएं भी बंद कर दी गई हैं। स्कूल संचालक कह रहे हैं कि स्कूल में आकर पढ़ो। हमें हमारे बच्चों के भविष्य की चिंता है। हम शिक्षा के नाम पर उनकी बलि नहीं दे सकते।
- कुलबीर सिंह।
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स्कूल हम पर परिणाम घोषित करने के बाद से ही दाखिले के नाम पर वार्षिक शुल्क जमा करवाने का दबाव बना रहा है। जब डेढ़ साल से हमारे बच्चों ने स्कूल के भवन समेत अन्य सामान का इस्तेमाल ही नहीं किया तो हम वार्षिक शुल्क किस बात का दें।
- संजय कुमार।
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स्कूल को सिर्फ वार्षिक शुल्क से ही मतलब है जबकि हमें हमारे बच्चों के स्वास्थ्य की भी चिंता है। अभिभावकों से पैसे एेंठने के लिए ऑफलाइन परीक्षा लेने का नया तरीका अपनाया जा रहा है।
- मोनिका।
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हमें मानसिक तौर पर परेशान करने के लिए स्कूल नित नए हथकंडे अपना रहा है। कोरोना काल में न सिर्फ हमसे वार्षिक शुल्क देने का दबाव बनाया जा रहा है बल्कि अब जब तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है तो भी स्कूल ऑफलाइन परीक्षा लेने की बात कर रहा है।
- अंजली गर्ग।
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कोरोना के कारण कारोबार भी हाशिए पर आ चुके हैं। वहीं स्कूल की ओर से फोन या फिर संदेश भेज कर हम पर वार्षिक शुल्क जमा करवाने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। जब हम फीस दे रहे हैं और अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ने के लिए कह रहे हैं तो स्कूल ने ऑनलाइन कक्षाएं क्यों बंद की।
- गगनजोत कौर।
स्कूल ने बिना अभिभावकों से सहमति पत्र लिए स्कूल खोल दिया है। जबकि प्रदेश में तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। स्कूल को सिर्फ अपनी जेब भरने की पड़ी है। हमारे लिए बच्चे ही सब कुछ हैं। हम इन हालातों में अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। हमारी मांग है कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते तब तक हमारे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जाए।
- कोमल।
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अभिभावकों की शिकायत मिली है, जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।