अंबाला सिटी/नारायणगढ़। डीएपी खाद के लिए हर ओर हाहाकार के हालात हैं। किसान खाद के लिए दर-दर भटकने को लाचार दिख रहे हैं। किसानों को लंबी लाइन में लगने के बावजूद खाद नहीं मिल पा रही। खाली हाथ वापस लौटने से नाराज किसान अव्यवस्था के लिए सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं।
रविवार को नारायणगढ़ अनाज मंडी भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। किसान लंबी कतार लगाए खड़े हुए थे पर घंटों तक इंतजार के बाद भी उन्हें डीएपी नहीं मिली। ऐसे में उन्हें खाली हाथ बैरंग लौटना पड़ा। किसानों का कहना है कि डीएपी न मिलने के कारण गेहूं की बिजाई में देरी हो रही है। यदि सरकार समय रहते डीएपी खाद की पूर्ति कर देती तो समय पर गेहूं की बिजाई का काम पूरा कर सकते हैं।
किसानों ने यह भी कहा कि अभी डीएपी खाद की किल्लत से परेशानी है। महीने भर बाद जब यूरिया खाद की जरूरत पड़ेगी तब फिर यही हालात झेलने पड़ेंगे। इससे फसल खराब होने की भी आशंका है। दूसरी ओर इस संबंध में अधिकारियों ने भी डीएपी की किल्लत को स्वीकारा है। बताया गया कि रैक लगाने का आश्वासन मिल रहा है पर कब, इसकी जानकारी नहीं है।
करीब पांच एकड़ की फसल बिना डीएपी खाद के बिजाई कर चुके हैं। सरकार किसानों को डीएपी खाद उपलब्ध करवाने में पूरी तरह से फेल हो चुकी है। किसानों की परेशानियों से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। डीएपी खाद न मिलने के कारण गेहूं की बिजाई में देरी हो रही थी। प्राइवेट दुकानों पर विकल्प है पर वह बहुत महंगा है। मजबूरी में किसान प्राइवेट दुकानों से खाद-बीज आदि की खरीदारी कर गेहूं की बिजाई कर रहा है। - गुरमीत सिंह किसान, गांव गरनाला।
डीएपी खाद न मिलने के कारण प्राइवेट दुकान से एनपीके, सातला 15-15 आदि खाद की खरीदारी कर पांच एकड़ में गेहूं की बिजाई की है। प्राइवेट दुकानदार पांच बैग एनपीके खाद के साथ चार हजार रुपये का एक थैली बीज जबरन दे रहे हैं जबकि बढ़िया बीज एक हजार रुपये तक आसानी से मिल जाता है। डीएपी न मिलने के कारण एनपीके खाद के साथ मजबूरी में महंगा बीज लेना पड़ रहा है। - मनजीत सिंह किसान, गांव गरनाला।
किसानों की सरकार अनदेखी कर रही है। न पर्याप्त मात्रा में बिजली उपलब्ध है और अब खाद संकट। पिछले दिनों जब गेहूं बिजाई से पूर्व खेतों में सिंचाई करनी थी, तब कुछ ही घंटे ही बिजली दी गई थी। इस दौरान डीएपी संकट से जूझ रहे हैं। आगे जब किसानों को यूरिया खाद की जरूरत होगी तो वह नहीं मिलेगी। ऐसी परिस्थितियों में किसान बेबस और लाचार ही नजर आता है। - कुलदीप सांगवान, किसान एवं आढ़ती, अंबाला सिटी।
किसान अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। किसानों को समय पर खाद न उपलब्ध करवाना सरकार की नाकामी है। सरकार को सितंबर माह में ही डीएपी खाद की व्यवस्था पूरी करनी चाहिए थी कि किसानों को खाद की जरूरत के अनुसार ही सरकार को अपना काम करना चाहिए। यदि सरकार सही समय पर व्यवस्था करती तो आज किसान डीएपी खाद के लिए धक्के नहीं खा रहे होते। - भारत भूषण अग्रवाल, आढ़ती अनाज मंडी, अंबाला सिटी।
जिला डीएम कार्यालय में डीएपी खाद को लेकर बातचीत का सिलसिला जारी है। रैक लगाने का आश्वासन मिला है लेकिन जिलेभर की किसी भी सोसायटी में अभी डीएपी खाद नहीं है। कार्यालय में प्रतिदिन बहुत किसान डीएपी खाद लेने के लिए पहुंच रहे हैं परंतु खाद न होने के कारण वे निराश हैं। जब भी खाद का कोई विकल्प होगा तो किसानों को खाद जरूर दिया जाएगा। - मैनेजर बलबीर सिंह, दी अंबाला को-ओपरेटिव सोसायटी, अंबाला सिटी।