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‘जीवन में अहंकार नहीं, जीवों से करें प्यार’

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अंबाला सिटी के सैक्टर दस स्थित श्री वैष्णो माता मंदिर भवन में चल रही श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन ? - फोटो : Ambala
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सेक्टर दस स्थित श्री वैष्णो माता मंदिर मेें चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन व्यास कीर्तिकिशोरी महाराज ने श्रीकृष्ण भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। यह सभी बातें ग्रंथों में भी बताई जा चुकी हैं। भारतीय संस्कृति के अनुसार जब भी धरती पर अहंकारी पैदा हुए, भगवान ने किसी न किसी रूप में आकर उनका सर्वनाश किया है।
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वेदों व पुराणों में व्याख्यान किया गया है कि कोई भी राजा हो या देवता, जब भी उनमें अहंकार आया तो उनके अहंकार को भगवान ने क्षण भर में ही खत्म कर दिया। स्वर्ग लोक के मालिक कहे जाने वाले इंद्र देवता में भी अहंकार उत्पन्न हो गया था। भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त प्राणियों को एक गोवर्धन पर्वत के नीचे लेकर इंद्र देवता का अहंकार तोड़ा था। इसी प्रकार जब रावण के अंदर अहंकार पैदा हुआ, तो विष्णु के अवतार भगवान श्रीराम ने अहंकारी रावण का वध कर उसके अहंकार को मिट्टी में मिलाया था।
इसलिए सभी को अपने जीवन में किसी प्रकार का अहंकार नहीं करना चाहिए। हमेशा सभी जीवों से प्यार करें और भगवान का ध्यान करते हुए अपने कर्म करते जाएं। अच्छे कर्मों के आधार पर ही मनुष्य को भगवान की शरण मिलती है। वहीं कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जी की लीलाओं का सुंदर वर्णन संगीतमयी भजनों द्वारा किया गया। जिसमें सभी भक्तजन मंत्रमुग्ध होकर झूमे। श्री वैष्णो माता मंदिर भवन का पूरा वातावरण श्रीकृष्ण भक्तिमय हो गया।

अंबाला सिटी के सैक्टर दस स्थित श्री वैष्णो माता मंदिर भवन में चल रही श्रीमद भागवत कथा में उपस्थित- फोटो : Ambala

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