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आंदोलन बरकरार, आदेश का इंतजार

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शंभू बॉर्डर पर बैठे किसान। - फोटो : Ambala
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सरकार द्वारा कृषि कानूनों की वापसी का एलान कर दिया गया है। इसके बाद भी किसानों की ओर से आंदोलन जारी रखा गया है। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार संवैधानिक तौर पर कानूनों को वापस नहीं ले लेती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
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एमएसपी को लेकर संघर्ष करने, सभी केस की वापसी की मांग व अन्य मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होनी थी। मगर, बैठक को किन्हीं कारणों से टाल दिया गया है। अब यह बैठक 27 नवंबर को आयोजित की जाएगी। अब किसान संयुक्त किसान मोर्चा के अगले आदेशों का इंतजार करेंगे और तब तक ऐसे ही आंदोलन को मजबूती के साथ जारी रखेंगे। इसके अलावा 26 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं।
जो आदेश आएगा, पालन किया जाएगा
हम शुरुआत से ही आंदोलन से जुड़े हुए हैं। उसी का ही फल है कि सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े हैं। अब हमारी अन्य मांगे हैं, जिनको लेकर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद जो भी आदेश आएगा पालन किया जाएगा।
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- मलकीत सिंह, प्रधान, भाकियू, अंबाला
यह जीत आधी है
एक साल के संघर्ष के बाद जीत मिली है। मगर, अभी यह जीत आधी है। पूरी जीत तब होगी जब सरकार संवैधानिक तौर पर कानून होंगे। इसके अलावा सरकार ने किसानों पर केस दर्ज किए हैं, उन सभी को वापस लेने के साथ एमएसपी की गारंटी देगी।
- गुलाब सिंह, उप प्रधान, भाकियू अंबाला।
कानूनों के संवैधानिक तौर पर वापसी का इंतजार
किसान अभी आंदोलन कर रहे हैं, हमारी सभी मांगे मानी जानी तक आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। सरकार ने अभी तक केवल एलान किया है, न कि कानूनों को संवैधानिक तौर पर वापस लिया है। उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब संवैधानिक तौर पर कानून वापस होंगे।
- बलविंद्र सिंह, किसान।
आंदोलन आधे से ज्यादा सफल
कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहा किसानों का आंदोलन आधे से ज्यादा सफल हो चुका है। 27 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बैठक की जाएगी, उस बैठक में मोर्चा क्या कुछ निर्णय लेता है। आंदोलन कैसे चलाना है, उसी पर विचार करके आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
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- जय सिंह, किसान।
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