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मंथरा के कहने पर कैकेयी ने श्रीराम के लिए 14 वर्ष का बनवास, युवराज भरत के लिए राज्याभिषेक मांगा - पंडित भगवती प्रसाद

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श्री महादेव नीलकंठ मंदिर सेक्टर सात में चल रहे सामूहिक श्री 108 रामायण का पाठ में वीरवार को रजत शर्मा परिवार की ओर से विधिपूर्वक पूजा अर्चना करवाई गई तथा प्रसाद की सेवा भी की गई। इस दौरान पंडित धर्मेंद्र गौड़ व पंडित त्रिलोचन शर्मा की ओर से संगीतमय गणेश वंदना की गई। मंदिर पुरोहित पंडित भगवती प्रसाद ने श्री रामायण पाठ की कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार देवराज इंद्र शम्बरासुर नामक राक्षस से युद्ध कर रहे थे, किन्तु वह राक्षस बहुत ही बलशाली था उसका सामना करने में देवतागण असमर्थ हो रहे थे, उस समय देवताओं ने राजा दशरथ से मदद मांगी।
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इस युद्ध में राजा दशरथ के साथ रानी कैकेयी स्वयं रथ सारथी के रूप में उनके साथ थी। उसी समय किसी शत्रु ने युधास्त्र चला कर दशरथ को घायल कर दिया था और वह मरणासन्न हो गए। राजा दशरथ की हालत को देखते हुए रानी कैकेयी रथ को रणभूमि से दूर ले गई और राजा का उपचार किया। जिस कारण राजा दशरथ की जान बच सकी। उस दौरान राजा दशरथ ने कहा कि कैकेयी तुमने मेरी जान बचाई है। आज से इन प्राणों पर तुम्हारा हक है। आज कोई दो वर मांग लो मैं तुम्हें वचन देना चाहता हूं। इस पर कैकेयी ने कहा कि आपके प्राण बचाना मेरा कर्तव्य है और अभी मुझे कुछ नहीं चाहिए। इन दोनों वरदानों की आवश्यकता भविष्य में जब कभी पड़ेगी तब मैं यह वचन मांग लुंगी। इसी प्रकार कथा आगे बढ़ी। इस मौके पर सभी भक्तजनों ने विशेष आरती में भाग लिया व प्रसाद ग्रहण किया।
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