दिन ब दिन गिरते तापमान से ठंड बढ़ रही है। इससे बेसहारा लोगों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। रैन बसेरे बंद होने के कारण ये लोग खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अभी तक रैन बसेरों को खोलने के आदेश जारी नहीं किए गए हैं।
रैन बसेरे बंद होने के कारण अंबाला छावनी और शहर में हर जगह जरूरतमंद और बेसहारा लोग खुले आसमान के नीचे पतले से कंबल में रात बिता रहे हैं। इन लोगों को ठंड से बचाने के लिए सामाजिक संस्थाएं उन्हें गर्म कपड़े वितरित कर रहीं हैं। लेकिन इन लोगों के लिए रहने की व्यवस्था करवाने में प्रशासन व रैड क्रॉस विफल साबित हो रहा है।
ठंडे मौसम में इनके रहने की व्यवस्था करवाने का कार्य प्रशासन का है। लेकिन अभी इनके रहने की व्यवस्था करना तो दूर रैन बसेरे खोलने के आदेश तक जारी नहीं हो पाए हैं। इससे इन लोगों के साथ-साथ वे यात्री भी परेशान हैं जिनकी ट्रेन देरी से आने वाली होती है। रेलवे स्टेशन के पास जो होटल है वह काफी महंगे दाम पर मिलते हैं। ठहरने का दूसरा विकल्प न होने के कारण वह भी ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं।
यहां-यहां हैं रैन बसेरे
अंबाला शहर में केवल एक रैन बसेरा है। जो कि बस स्टैंड के पास स्थित है। इस रैन बसेरे में 25 लोगों के सोने की व्यवस्था है वहीं जरूरत के हिसाब से इस संख्या को बढ़ा दिया जाता है। मगर इसके खोलने को लेकर अभी तक कोई भी आदेश नहीं है। ऐसे ही छावनी में बस स्टैंड के प्रवेश द्वार पर दो भवन का रैन बसेरा है। यहां पर 70 लोगों के ठहराने की व्यवस्था है। मगर यहां भी संख्या से बहुत कम ही लोग आते है। जहां अधिकतर समय एक भवन पर ताला लगा रहता है। इसके अलावा बस स्टैंड के अंदर बने रैन बसेरे में भी तीन कमरे हैं जो कि कोरोना काल के शुरू से लेकर अभी तक खुले ही नहीं है। अभी भी इन्हें खोलने को लेकर को आदेश नहीं है।
हमारे पास अभी तक कोई भी आदेश नहीं आए हैं। जैसे ही रैन बसेरों को खोलने के आदेश आ जाएंगे। हम उसी के अनुसार कार्य करेंगे। उम्मीद है कि एक सप्ताह के अंदर अंदर आदेश जा जाएंगे।
- विक्की, सिटी रैन बसेरा इंचार्ज
अभी इस संबंध में उपायुक्त से बात करेंगे। जल्द ही रैन बसेरों को खोलने और अन्य स्थानों पर व्यवस्था करवा दी जाएगी। ताकि लोगों को परेशानी न हो।
- विजय लक्ष्मी, सचिव, रैड क्रॉस अंबाला।