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डीएपी खाद की किल्लत से जूझ रहे किसान, सरकार से जल्द समाधान की मांग

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डीएपी खाद की कमी के कारण किसानों की परेेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद न मिलने के कारण वह गेहूं की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में महंगे दामों पर डीएपी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्योंकि जितनी डीएपी खाद प्रशासन की ओर से मुहैया करवाई जा रही है, उतने से बुआई करना किसी भी हालत में संभव नहीं है।
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किसानों ने मांग की है कि प्रशासन को किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद उपलब्ध करवाई जाए। इससे कि वह समय पर गेहूं की बुआई का कार्य पूरा कर सकें। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से प्रतिदिन दुकानों का सर्वे किया जा रहा है कितनी खाद आ रही है कितना खाद बेची जा रही है और किसान को कितनी खाद दी जा रही इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ताकि डीएपी की कालाबाजारी पर लगाम लगाई जा सके। इससे पूर्व प्रशासन की ओर से तीन दुकानदारों के 15 दिनों के लिए लाइसेंस भी रद्द किए गए थे।
डीएपी की कमी होने के कारण अब तक 40 एकड़ जमीन में करीब 16 एकड़ में ही गेहूं की बिजाई कर पाए हैं। हैरानी की बात यह भी है कि सरकार की ओर से हमें अभी तक एक भी बैग डीएपी का नहीं मिला। यदि किसान को खाद समय पर ही नहीं मिलेगी तो गेहूं की बिजाई में देरी होगी। इससे फसलों की जो आवक औसत कम हो जाएगा और किसानों को भारी नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है।
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- कुलदीप सांगवान, किसान एवं आढ़ती, अंबाला सिटी।
सरकार की ओर से किसानों को डीएपी खाद तो नहीं दिया जा रहा है लेकिन किसानों को खाली आश्वासन देकर ही संतुष्ट किया जा रहा है। गांव जटवाड़ की को-ऑपरेटिव सोसायटी में डीएपी खाद आने की सूचना तो मिली थी। मगर वह सब सोसायटी के कर्मचारियों के नजदीकी लोगों को आनन-फानन में खाद वितरण कर दिया था। जब तक किसानों को तक सूचना पहुंचती, तब तक खाद ही खत्म हो चुकी थी। - नानक सिंह किसान, गांव जटवाड़।
करीब 15 एकड़ जमीन में गेहूं की बिजाई करनी है परंतु सरकारों के पास किसानों के लिए डीएपी खाद न होने के कारण किसान बहुत परेशानी से गुजर रहा है। खाद का इंतजार करते बहुत समय निकल चुका था। लेकिन खाद तो नहीं मिली। बिना खाद के ही चार एकड़ में गेहूं की बिजाई कर दी है। अब सरकार के भरोसे तो गेहूं नहीं बिजाई कर सकते थे अब तो भगवान के भरोसे गेहूं की बिजाई कर दी है। सरकार का रवैया किसानों के प्रति सही नहीं है।
- राजबीर सिंह किसान, गांव अंटाला।
किसान पिछले 15 दिनों से डीएपी खाद के लिए सरकारी गोदामों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन सरकार के पास कुछ समय पहले खाद तो आई थी लेकिन यह खाद मात्र कुछ ही घंटों में गायब हो चुकी थी। कुछ किसान मिली भगत कर डीएपी खाद लेने में कामयाब रहे। कई किसानों को अभी भी खाद नहीं मिल पाई है। वह आज भी डीएपी खाद मिलने का इंतजार कर रहे हैं। खाद न मिलने कारण वह अपने खेत में गेहूं की बिजाई नहीं कर पाए हैं।
- कुलदीप सिंह किसान, पंजोखरा साहिब।
सरकार की ओर से किसानों के लिए सभी चीजों के दामों में बढ़ोतरी की गई है। जहां पहले गेहूं की बिजाई में करीब छह हजार पांच सौ रुपये का खर्च आता था वहीं आज करीब 12 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। पिछले साल डीजल करीब 50 रुपये प्रति लीटर था इस बार करीब 100 रुपये प्रति लीटर हो चुका है। जो किसानों के ऊपर अतिरिक्त भार है। किसानों को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। इस सरकार ने किसानों का बुरा हाल कर दिया है।
- देवेंद्र सिंह किसान, पंजोखरा साहिब।
महंगाई के इस दौर में सबसे बड़ी दिक्कत छोटे किसानों को आ रही है। जिनको अपने खेतों में सभी काम किराए पर करवाने पड़ते हैं। पिछले साल गांव से अंबाला सिटी अनाज मंडी का किराया प्रति ट्राली एक हजार रुपये लिया जाता था। जोकि आज के समय में दो हजार हो चुका है। छोटे किसानों को खेती करने में बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार साधन उपलब्ध नहीं हो पाते जिस कारण उन्हें बड़ी समस्याओं से गुजरना पड़ता है।
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-जसबीर सिंह किसान, पंजोखरा साहिब।
हमारी ओर से पूरा प्रयास है कि सभी किसानों तक डीएपी पहुंचे। डीएपी खाद की काला बाजारी न हो हमने टीमें गठित की है जो प्रतिदिन काम कर रही है।
- हितेष, एसडीएम, अंबाला।
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