फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haryana: थनेला रोग पर एंटीबायोटिक दवाएं हो रहीं बेअसर, किसान भी इससे अंजान

Mon, 24 Apr 2023 10:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)

सार

थनेला रोग दो प्रकार का होता है, जिसमें लक्षण और बिना लक्षण के रोग शामिल हैं। लक्षण वाले रोग के दौरान पशु के थनों में सूजन आना, दूध में रेशे आना, दूध का स्वाद बदलना, पानी जैसा दूध आने लगता है। वहीं बिना लक्षण वाले पशुओं में लैब में जांच कराने पर ही रोग की पुष्टि होती है।
विज्ञापन
थनेला रोग - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पशुओं के थनों में होने वाले थनेला रोग पर कई एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो चुकी हैं। इस बात का खुलासा लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) की अंबाला स्थित पशु रोग जांच प्रयोगशाला ने किया है।

विज्ञापन


चिकित्सक रोजाना की प्रैक्टिस में अमल में ला रहे
दरअसल प्रयोगशाला में थनेला रोग को लेकर एंटीबायोटिक सेंसिटिविटी टेस्ट किया गया, जिसमें कुछ एंटीबायोटिक दवाएं प्रदर्शन नहीं दिखा पाईं, जो दवाएं बेअसर होती जा रही हैं, उनको हरियाणा के कई जिलों में पशु चिकित्सक रोजाना की प्रैक्टिस में अमल में ला रहे हैं। वहीं किसान भी इससे अंजान है। इस कारण पशु का थन सही उपचार न मिलने की दशा में खराब हो जाता है।

जीटी बेल्ट और पंजाब से लिए नमूने
जिन नमूनों पर प्रयोगशाला में वैज्ञानिक ने जांच की, वह पंजाब के मोहाली, पटियाला के आसपास के गांव के थे। वहीं हरियाणा में अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, पंचकूला आदि स्थानों से किसानों ने पशुओं के सैंपल भेजे तो उनकी जांच की गई। इसको लेकर लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में एक शोध पत्र भी प्रकाशित है, जिसमें बताया गया है कि किस प्रकार से एंटीबॉयोटिक दवाएं बेअसर हो रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

जीवाणु दवा को लेकर अपने भीतर प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं

दरअसल थनेला रोग जीवाणुओं के द्वारा होता है, हालांकि विषाणु, कवक, माइको प्लाज्मा इत्यादि भी यह रोग उत्पन्न करते हैं। ऐसे में अगर एक ही प्रकार की दवा पशु को दी जाए तो जीवाणु उस दवा को लेकर अपने भीतर प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में दवा असर नहीं करती और पशु का थन खत्म हो जाता है।

दो प्रकार का होता है थनेला रोग
थनेला रोग दो प्रकार का होता है, जिसमें लक्षण और बिना लक्षण के रोग शामिल हैं। लक्षण वाले रोग के दौरान पशु के थनों में सूजन आना, दूध में रेशे आना, दूध का स्वाद बदलना, पानी जैसा दूध आने लगता है। वहीं बिना लक्षण वाले पशुओं में लैब में जांच कराने पर ही रोग की पुष्टि होती है। इसको लेकर उपचार में देरी हुई तो पशुपालक को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें