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सूरमाओं का गांव तेपला, गांव का तीसरा बेटा शहीद, गांव रोया नहीं फर्ख से ऊंचा हुआ सिर

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सूरमाओं का गांव तेपला, गांव का तीसरा बेटा शहीद, गांव रोया नहीं फक्र से ऊंचा हुआ सिर
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रमिंद्र सिंह
अंबाला कैंट। ‘फानूस बनकर जिसकी हिफाजत हवा करे, वो चिराग क्या बुझे जिन्हें रोशन खुदा करें’। गांव तेपला के लांस नायक विक्रमजीत सिंह बेशक दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए, मगर शहादत के बावजूद विक्रमजीत सिंह लोगों के जहन में सदैव अमर हो गए हैं। कल तक गांव की गलियों में खेलने कूदने वाले 25 वर्षीय लांस नायक विक्रमजीत सिंह को उनके दोस्त ‘सोनी’ कहकर पुकारते थे और आज इसी सोनी की शहादत पर दोस्तों आंखों में आंसू नहीं, बल्कि उनका सर फक्र से ऊंचा था। अदम्य पराक्रम एवं शौर्य की यह गाथा स्वर्णिम अक्षरों में आने वाले पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। जिले में तेपला एकमात्र ऐसा गांव है जहां से अब तक तीन बहादुर सपूतों ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहादत हासिल की। गांव में ढाई सौ से अधिक परिवारों का एक सदस्य सेना में है।
पथराई पिता की आंखें, पर नहीं टपके आंसू
जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में 36 राष्ट्रीय राइफल के लांस नायक विक्रमजीत सिंह की शहादत का समाचार मिलते ही घर के आंगन में अफसोस करने वालों का तांता लग गया। गांव के बड़े बुजुर्ग शहीद के परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचे, मगर विक्रमजीत सिंह के पिता बलजीत सिंह की आंखें पथराई हुई थीं। बेटे की शहादत का फक्र उन्हें था, वह बोले कि ‘देश के लिए लड़ता हुआ मेरा बेटा चला, उसकी शहादत पर मुझे गर्व है।’ उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान ही विक्रमजीत सेना में भर्ती होने की जिद्द करता था, वह अपने दादा से प्रेरित था जोकि सेना में थे और उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए वह सेना में भर्ती हुआ था।
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सोमवार को पत्नी से की एक घंटे तक बात
शहीद विक्रमजीत सिंह की पत्नी हरप्रीत कौर इस हादसे को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं। गर्भ में पल रहे बच्चे की खुशियां इस खबर के बाद मातम में तब्दील हो गईं। हरप्रीत ने बताया कि सोमवार को करीब एक घंटे तक फोन पर उनकी विक्रमजीत सिंह से बात हुई। वह अपनी यूनिट की बात करते रहे तो कभी आगामी दिनों में घर आने की। इस दौरान विक्रमजीत ने परिवार के सभी सदस्यों का हाल-चाल भी पूछा, वह सामान्य की तरह बात कर रहे थे। मगर, सुबह बुरी खबर आई जिसका यकीन उन्हें नहीं हुआ। वहीं विक्रम की मां कमलेश कौर का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें इस घटना पर यकीन नहीं हो रहा था। गांव की महिलाएं उन्हें संभाले हुए थीं। जिस बेटे का महज सात माह पहले सेहरा सजाया आज वही घर का बड़ा बेटा शहीद हो गया था।
दोस्त बोले- यारों का यार था सोनी
लांस नायक विक्रमजीत सिंह के दोस्त सुखविंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, किरपाल सिंह व अन्य ने बताया कि विक्रमजीत उर्फ सोनी यारों का यार था। वह जींदादिल मिजाज का था। अक्सर उनकी बात उससे होती तो वह वीरता की बातें किया करता था। देशभक्ति उसमें कूट-कूट कर भरी हुई थी और देश की रक्षा के लिए आज उसने अपने प्राणों को भी न्यौछावर कर इसे साबित किया। उन्होंने बताया कि विक्रम को सेना में भर्ती होने का जज्बा था और यही वजह है कि वह अंबाला स्थित सेना भर्ती कार्यालय से कई किलोमीटर दूर रोहतक में सेना भर्ती रैली में पहुंच गया था। वहीं से उसने सेना को ज्वाइन किया था।
कश्मीर की वादियों में ही खो गया तेपला का तीसरा सपूत
गांव तेपला से विक्रमजीत सिंह तीसरा सैनिक है जोकि जम्मू-कश्मीर में दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ है। इससे पहले वर्ष 1999 में आप्रेशन रक्षक के दौरान कारगिल में तेपला गांव के निवासी 30 वर्षीय मेजर गुरप्रीत सिंह 19 अक्तूबर को शहीद हो गए थे। गांव के ही लांस नायक हरजिंद्र सिंह आठ जुलाई 2005 में जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गए थे। 13 सिख रेजिमेंट के हरजिंद्र सिंह भी आप्रेशन रक्षक के दौरान शहीद हुए थे।
ढाई सौ से अधिक परिवारों का एक सदस्य फौज में
तेपला गांव की महिला सरपंच सुमनीत कौर बताती हैं कि गांव के निवासियों में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी है और ढाई सौ से अधिक परिवारों का एक सदस्य सेना में है। उन्होंने बताया कि शहीद विक्रमजीत सिंह की शहादत पर समूचे गांव को गर्व है। विक्रम ने देश के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाई और अब देश को उसके परिवार की देखभाल करनी है। उन्होंने कहा कि सरकार शहीद के परिवार की मदद को आगे आए और हर संभव मदद करे।
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एडीसी और एसडीएम ने दी परिवार को सांत्वना
उधर, शाम को प्रशासन की ओर से एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह और एसडीएम सुभाष चंद्र सिहाग ने शहीद के घर जाकर परिजनों को सांत्वना दी। अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर को लाने के लिए भी सेना अधिकारियों के साथ तालमेल स्थापित किया और सेना अधिकारियेां के मुताबिक विक्रमजीत सिहं का पार्थिव शरीर बुधवार को ही गांव तेपला में पहुंच पाएगा। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर शहीद का पार्थिव शरीर लाया जाएगा। उधर, विक्रमजीत सिंह का छोटा भाई मोनू सिंह भी सेना में सिपाही है जोकि इस समय असम में तैनात है। विक्रमजीत की शहादत पर सीएम मनोहर लाल, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी, संासद रत्न लाल कटारिया, विधायक संतोष चौहान सारवान, विधायक असीम गोयल आदि ने दुख जताया है।
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