मरीज को ऑक्सीजन या आईसीयू की जरूरत है कि नहीं, अब एक ब्लड टेस्ट (खून जांच) से पता चल सकेगा। बीआरडी मेडिकल कॉलेज ने कोरोना महामारी के बीच ऐसे मरीजों की टीएलएम, सेरम फेरेटिन जैसी जांच से यह जानकारी हासिल की है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ महिम मित्तल ने बताया कि पहली और दूसरी लहर में गंभीर मरीजों की जांच कराई गई थी। उनके ब्लड सैंपल लिए गए थे। ब्लड सैंपल लेकर टीएलएम, सीरम फेरेटिन, सीरम एलडीएच, सीआरपी, फेब्रिनोजोन जैसी जांच की गई। जांच में गंभीर मरीजों में इनकी मात्रा काफी बढ़ी हुई मिली। इसके बाद स्थिति के अनुसार मरीजों को ऑक्सीजन देनी पड़ी। इसके अलावा इनके ज्यादा बढ़ने पर मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा।
बताया कि इन जांचों से यह पता लगाया जा सकता है कि मरीज की स्थिति कैसी है? उसे ऑक्सीजन या आईसीयू की जरूरत है भी या नहीं । इससे सही समय पर मरीज की स्थिति का पता भी चल जाएगा।
खून के थक्के जमने से हो चुकी है पहचान
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीजों की मौत खून के थक्के जमने से हुई थी। इसकी जानकारी विशेषज्ञों को बाद में हुई। जानकारी के बाद डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज शुरू किया तो उन्हें खून पतला करने की दवा देने लगे। इसका असर यह हुआ कि मौत की संख्या में कमी आई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि खून की कई जांच से मरीजों की स्थिति का सही पता लगाया जा सकता है। कोरोना महामारी के दौरान इस तरह की जांच भी की गई। इसका काफी फायदा मिला है। बताया कि पीटी आईएनएआर और फेब्रिनोजोन जांच से खून के थक्के बनने की आशंका का पता कुछ हद तक किया जा सकता है।