यूपी बोर्ड : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और सीआईएससीई की ओर से कोरोना महामारी के दृष्टिगत दसवीं की परीक्षाएं निरस्त किए जाने के बाद से यूपी बोर्ड में अध्ययनरत छात्र भी राहत के इंतजार में हैं। अभिभावक परीक्षाओं को निरस्त किए जाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि जब गोरखपुर जिले में यूपी बोर्ड के सापेक्ष इन दोनों बोर्ड से दसवीं में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या महज 25 फीसदी है। इसके बावजूद इनकी परीक्षाएं निरस्त की जा रही हैं। जबकि यूपी बोर्ड में अध्ययनरत 74356 विद्यार्थियों के हित में बोर्ड कोई फैसला क्यों नहीं ले रहा है।
जिले में सीबीएसई बोर्ड से संचालित 117 स्कूलों की दसवीं कक्षा में 15 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। वहीं सीआईएससीई से तीन हजार विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर को देखते हुए सीबीएसई और सीआईएससीई ने दसवीं की परीक्षाएं निरस्त कर दी है। वहीं इनके परिणाम प्री बोर्ड, यूनिट टेस्ट, अर्द्धवार्षिक परीक्षा के साथ नौंवी कक्षा के नंबरों के माध्यम से देने के निर्देश दिए हैं। जबकि यूपी बोर्ड में पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बाद भी परीक्षाओं को निरस्त किए जाने पर कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है।
जुबली इंटर कॉलेज की दसवीं कक्षा में बच्चे को पढ़ाने वाले पिता रमेश सिंह ने कहा कि सरकार को इस पर तत्काल फैसला लेना चाहिए। महामारी के खौफ में बच्चों की मनोदशा परीक्षा में शामिल होने जैसी नहीं हैं। एमजी इंटर कॉलेज के अभिभावक सुभाष पांडेय ने कहा कि बच्चों के वैक्सीनेशन भी अभी शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में दसवीं की परीक्षाएं निरस्त होनी ही चाहिए।