केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी का महराजगंज दौरा।
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भारत संत महात्माओं की पुण्यभूमि है, अनादि काल से हमारे ऋषि मुनि लोक कल्याण की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। गोरक्षपीठ इस परंपरा का लंबे समय से निर्वाह कर रहा है। खुद में ये पीठ अद्भुत है। शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक समरसता एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में इसका व्यापक योगदान है। इस पीठ के लिए सामाजिक समरसता सिर्फ सिद्धांत नहीं व्यवहार है।
ये बातें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को चौक बाजार स्थित ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाविद्यालय परिसर में गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के सातवीं पुण्यतिथि सप्ताह कार्यक्रम के दौरान उनकी मूर्ति का अनावरण करने के उपरांत उपस्थित जनसैलाब को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होनें कहा कि भारतीय धर्म संस्कृति के गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करते हुए नाथ सम्प्रदाय के ध्वजवाह बने महंत दिग्विजयनाथ से लेकर ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने पूर्वांचल ही नहीं संपूर्ण भारत वर्ष में सामाजिक सरोकार का उच्चस्तरीय मापदंड स्थापित करते हुए समाज के शोषित, वंचित, दलित पिछड़ों के हितों में काम किया।
उन्होंने अपनी स्मृतियों को रेखांकित करते हुए महंत अवेद्यनाथ के विलक्षण प्रतिभा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का बखान करते हुए अपने छात्र जीवन में मिले ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के सानिध्य व कुशल मार्गदर्शन का उल्लेख किया। उन्होनें कहा कि अवेद्यनाथ ने वाराणसी के डोम राजा के घर संतो के साथ सहभोज कर छुआछूत की प्रथा को समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया था। मिनाक्षी मंदिर में दलितों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ अवेद्यनाथ ने दलितों के साथ मिलकर जन आंदोलन किया। यहीं नहीं राम मंदिर आंदोलन के अगुआ के रुप में राम लला के स्थापना को लेकर हर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। आज उसी परंपरा को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगे बढा रहे हैं।
कहा कि लोककल्याण की दिशा में किया गया योगी आदित्यनाथ का एक एक कार्य नाथ सम्प्रदाय के लोककल्याणकारी परंपराओं पर आधारित हैं। योगी जिस दमदारी से उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में जुटे हैं, उसे देख यह कहने में तनिक भी संदेह नहीं हैं कि ऋषियों मनीषियों का संपूर्ण जीवन लोककल्याण के प्रति समर्पित होता हैं। इसके पूर्व महंत योगी आदित्यनाथ ने रक्षामंत्री का उत्तर प्रदेश और अपने महाविद्यालय परिसर में अभिनन्दन किया।