गोरखपुर में रेलवे में नौकरी के नाम पर जालसाजी करने वाले गिरोह के दो लोगों को एसटीएफ ने शनिवार रात रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया है। आरोपियों को मेरठ और गोरखपुर की संयुक्त एसटीएफ टीम ने दबोच कर कैंट पुलिस के हवाले किया है। मामले में कैंट में दर्ज जालसाजी के मुकदमे में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धारा बढ़ा दी गई है। आरोपियों के पास से पुलिस ने पांच एटीएम कार्ड, दो पैन कार्ड, एक वोटर आईडी, दो मोबाइल, कूटरचित नियुक्ति पत्र, अभ्यर्थियों के शैक्षिक दस्तावेज और नकदी बरामद किया है। आरोपियों की पहचान हापुड़ के पिलखुआ इलाके के दिनेश नगर निवासी रजनीश कुमार उर्फ राजू और गोला के चौकड़ी पोस्ट निवासी अतुल कुमार दुबे के रूप में हुई है।
एसटीएफ के मुताबिक, रेलवे कोऑपरेटिव बैंक, रेलवे क्लर्क व अन्य सरकारी नौकरियों में कूटरचित नियुक्ति पत्र देकर जालसाजी करने वाला गिरोह सक्रिय है। इस सूचना पर एसटीएफ जांच कर रही थी। शनिवार रात कार्मल स्कूल के पास पहुंची थी। उधर से मेरठ की टीम भी आई थी। टीम को सूचना मिली कि जालसाजी करने के दो आरोपी रेलवे स्टेशन के पास मौजूद हैं। सूचना पर पहुंची टीम ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी राजू ने बताया कि दो साल पहले लखनऊ में उसकी मुलाकात हृदय नारायण मिश्रा मथुरा से हुई थी। वह लखनऊ के एक होटल में ठहरे थे। हृदय से परिचय अतुल कुमार दुबे, शीतला प्रसाद पाठक गोला ने कराया था। कहा कि लड़के व पैसे लाओ तो तुम्हें भी हिस्सा मिलेगा।
ऐसे करते थे जालसाजी
शीतल और अतुल फर्जी कागज पर युवकों के हस्ताक्षर कराकर किसी सरकारी अस्पताल में ब्लड टेस्ट आदि करा लेते हैं। पैसे लिए जाते हैं और कुछ दिन बाद उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र दिया जाता है। जांच में पता चला है कि कोऑपरेटिव बैंक में नौकरी के नाम पर हृदय नारायण मिश्र ने पांच लाख रुपये आठ लोगों से लिए थे। ज्यादातर पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों को फंसाया जाता था।
आठ लाख में देते थे क्लर्क की नौकरी
पूछताछ में पता चला है कि आठ लाख रुपये में यह लोग क्लर्क पद पर नौकरी देने का दावा करते थे। दो लोग शनिवार को भी आए थे। टोकन मनी के तौर पर 50-50 हजार रुपये दिए थे। अतुल ने उन लेेगों का मेडिकल के लिए कागज पर अंगूठा लगवाया था। उसी को फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र देने के लिए दोनों जालसाज आए थे।