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डॉक्टर की सलाह: हाथों और पैरों में झनझनाहट तो बुर्जर रोग का खतरा, इन उम्र के लोगों को है अधिक खतरा

Wed, 16 Feb 2022 01:43 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

डॉक्टर की भाषा में बुर्जर रोग को थ्रंबो एंजाइटिस आब्लिट्रेंस बीमारी कहा जाता है। यह बीमारी 25 से 40 साल के युवाओं को सबसे ज्यादा हो रही है। यह युवतियों और महिलाओं में भी देखने को मिल रही है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शरीर के किसी हिस्से में दर्द, जलन या झनझनाहट हो तो इसे नजर अंदाज न करें। यह थ्रंबो एंजाइटिस ऑब्लिट्रेंस बीमारी का संकेत है। नसों से संबंधित इसे बुर्जर रोग कहा जाता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल से लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में इस तरह के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 80 प्रतिशत मरीजों की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर दर्द, जलन या झनझनाहट होती है तो तत्काल जांच कराएं।  

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जिला अस्पताल के डॉ राजेश कुमार ने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित होने पर शरीर की कुछ नसों में सिकुड़न आने लगती है। कभी-कभी रक्त वाहिकाओं में थक्का भी जमने लगता है। आमतौर पर यह बदलाव धीमा होता है, जिस पर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। इसकी वजह से समस्या गंभीर हो जाती है। बताया कि ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या ठंड के बाद अचानक बढ़ गई है। प्रतिदिन 15 से 20 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।

ये सभी युवा हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ गगन गुप्ता ने बताया कि इस बीमारी का बड़ा कारण धूम्रपान, अनियमित जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतें हैं। ओपीडी में आने वाले 90 प्रतिशत मरीज धूम्रपान कर रहे हैं। प्रतिदिन बीआरडी में प्रतिदिन 30 से 35 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें पांच प्रतिशत महिलाएं भी शामिल हैं।
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अचानक होने लगता है तेज दर्द

डॉ राजेश कुमार ने बताया कि थ्रंबो एंजाइटिस ऑब्लिट्रेंस से प्रभावित होने पर हाथों और पैरों में अचानक तेज दर्द होने लगता है। मरीज की अंगुलियां पीली लाल या नीली दिखाई देने लगती हैं और छूने पर ठंड महसूस होती है। ऐसा खून में रुकावट की वजह से होता है। बीमारी में आराम करने पर भी हाथों और पैरों में दर्द लगातार बना रहता है। किसी भी तरह का तनाव होने पर समस्या और बढ़ जाती है। अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज न किया गया तो पैरालाइसिस का खतरा 90 प्रतिशत बढ़ जाता है।

जांच डॉक्टर की सलाह पर कराएं

डॉ राजेश ने बताया कि थ्रंबो एंजाइटिस ऑब्लिट्रेंस गंभीर बीमारी है। इसकी जांच प्लेथिस्मोग्रॉफी, रक्त वाहिकाओं का अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे से की जाती है। कई बार इन जांचों से भी रोग की सही जानकारी नहीं हो पाती है। ऐसे में रक्त वाहिका की बायोप्सी भी की जाती है। इलाज करीब एक से डेढ़ साल तक चलता है। समस्या बढ़ने पर सर्जरी करनी पड़ती है। सर्जरी में रक्त के प्रवाह को बाधित करने वाली नस को काटकर निकाल दिया जाता है।
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